वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खिलौना उद्योग में वृद्धि की संभावनाओं का ज़िक्र करते हुए मंगलवार को कहा कि भारतीय खिलौना विनिर्माताओं को वैश्विक खिलौना बाज़ार में कम से कम एक-चौथाई हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। अनुमान है कि 2032 तक यह बाज़ार 179 अरब अमेरिकी डॉलर का हो जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमें आत्म निर्भर होने के लिए बड़े लक्ष्य रखने चाहिए।(फोटो क्रेडिट-iStock)
वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय खिलौना प्रदर्शनी के दौरान अपने संबोधन में कहा कि भारत वर्तमान में 153 देशों को खिलौनों का निर्यात कर रहा है और वर्ष 2025-26 में भारत से खिलौनों का निर्यात बढ़कर 18.6 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि 2019-26 के दौरान खिलौनों के आयात में 71 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलौना बाजार के वर्ष 2034 तक पांच अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि वैश्विक बाजार वर्ष 2032 तक 179 अरब डॉलर का हो सकता है।
हमें ऊंचे लक्ष्य रखना चाहिए
सीतारमण ने कहा, 'हम 2034 तक मात्र पांच अरब डॉलर के बाजार का लक्ष्य रख रहे हैं। मेरा मानना है कि हम इससे कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। हमें वैश्विक बाजार के 179 अरब अमेरिकी डॉलर के कम से कम एक-चौथाई हिस्से का लक्ष्य तो रखना ही चाहिए। यह एक बड़ी संख्या है। लेकिन हमें और ऊंचे लक्ष्य रखने चाहिए।'
उन्होंने कहा कि पहले भारत में खिलौनों का आयात मुख्य रूप से एक देश से होता था, जहां से बड़ी मात्रा में सस्ते और कई बार सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले खिलौने आते थे, जो बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं थे।
ब्रांड निर्माण पर भी ध्यान देने की जरूरत
वित्त मंत्री ने खिलौना उद्योग से उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ब्रांड निर्माण पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ’’विनिर्माण महत्वपूर्ण है, लेकिन ब्रांड उसका वास्तविक मूल्य तय करता है। उपभोक्ताओं में ऐसा भरोसा होना चाहिए कि वे बिना किसी संदेह के किसी ब्रांड का उत्पाद खरीद सकें।’’ सीतारमण ने फ्रांस की खेल सामग्री कंपनी डेकाथलॉन का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देती है।
सरकार ने देश में खिलौना विनिर्माण को बढ़ावा देने और चीन जैसे देशों से आयात पर निर्भरता कम करने के लिए अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण मानक लागू करने, आयात शुल्क को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने समेत कई कदम उठाए हैं। उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय की पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए कोष योजना (एसएफयूआरटीआई) का उल्लेख करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद बांसुरी स्वराज से राजधानी में खिलौना निर्माण के लिए एक क्लस्टर की पहचान करने का सुझाव दिया।
(इनपुट-भाषा)
