Income Tax Act 2025 : केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने बुधवार (1 अप्रैल 2026) को घोषणा की कि नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 भारत के टैक्स प्रशासन में एक नए युग की शुरुआत है। यह कानून अब आधिकारिक रूप से लागू हो गया है और छह दशक पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 का स्थान लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स कानून को सरल, स्पष्ट और करदाताओं के लिए अधिक समझने योग्य बनाना है। सीबीडीटी ने कहा कि नया कानून मूल कर नीति में बदलाव किए बिना भाषा और संरचना को सरल बनाकर करदाताओं के लिए अनुपालन आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नए कानून में भाषा आसान और पाठक-अनुकूल है, जिससे करदाता अपनी जिम्मेदारियों को आसानी से समझ सकेंगे।
भारत में टैक्स का नया दौर शुरू: इनकम टैक्स कानून 2025 से सिस्टम होगा और सरल (तस्वीर-istock)
संक्रमण काल और ई-फाइलिंग की सुविधा
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक इनकम टैक्स विभाग ने बताया कि नया ई-फाइलिंग पोर्टल दोनों, पुराने और नए कानून के तहत करदाताओं को रिटर्न फाइल करने की सुविधा देगा। इसका मतलब है कि पुराने अधिनियम के तहत चल रही सभी आकलन, अपील और अन्य प्रक्रियाएं उनके अंतिम समाधान तक पुराने कानून के अनुसार ही पूरी होंगी। करदाता जुलाई 2026 में आकलन वर्ष 2026-27 के लिए रिटर्न दाखिल करते समय पुराने कानून के अनुसार ही निर्धारित फॉर्म का उपयोग करेंगे। वहीं टैक्स वर्ष 2026-27 के लिए अग्रिम कर का भुगतान नए कानून के अनुसार किया जाएगा। इससे संक्रमण काल में करदाताओं के लिए कोई परेशानी नहीं होगी और उन्हें दोनों कानूनों के बीच सहजता से काम करने का अवसर मिलेगा।
टैक्स वर्ष और भुगतान समयसीमा में बदलाव
इनकम टैक्स एक्ट 2025 ने टैक्स वर्ष और पिछले वर्ष के बीच का अंतर समाप्त कर दिया है। अब करदाताओं के लिए केवल एक ही ‘टैक्स वर्ष’ रहेगा, जिससे कर भुगतान और रिटर्न फाइलिंग की समयसीमा सरल हो जाएगी। इससे करदाता समयसीमा के बाद भी अपनी आयकर रिटर्न दाखिल कर सकते हैं और टीडीएस वापसी का दावा कर सकते हैं, बिना किसी जुर्माने के। सीबीडीटी ने बताया कि यह बदलाव कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी और करदाताओं के लिए अनुकूल बनाएगा। नया कानून कर दाताओं को सरल नियमों के तहत कर भुगतान और फाइलिंग की सुविधा देगा और इससे अनुपालन में वृद्धि होने की संभावना है।
विकसित भारत की दिशा में कदम
केंद्र सरकार का कहना है कि नया इनकम टैक्स कानून, 2025 केवल कर प्रशासन में सुधार नहीं है, बल्कि यह विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। आसान भाषा और सुव्यवस्थित संरचना करदाताओं को नियमों को समझने में मदद करेगी। इसका उद्देश्य करदाताओं और प्रशासन के बीच विश्वास और पारदर्शिता बढ़ाना है। सीबीडीटी ने कहा कि नया कानून टैक्स प्रणाली को डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में भी एक पहल है। ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिये से करदाता अब कहीं से भी रिटर्न फाइल कर सकते हैं और अपने कर मामलों को ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं।
इनकम टैक्स एक्ट 2025 टैक्स कानून को सरल, स्पष्ट और करदाताओं के अनुकूल बनाता है। पुराने अधिनियम के छह दशक बाद यह कानून कर प्रशासन में नई शुरुआत है। टैक्स वर्ष और रिटर्न फाइलिंग की समयसीमा को सरल बनाना, ई-फाइलिंग की सुविधा, और टीडीएस वापसी की सुविधा करदाताओं के लिए बड़े सुधार साबित होंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत के कर प्रशासन को डिजिटल, पारदर्शी और विकसित बनाने में मदद करेगा।
