दुनिया के आर्थिक नक्शे पर भारत एक ऐसी महाशक्ति बनकर उभर रहा है, जिसे अब नजरअंदाज करना नामुमकिन है। हाल ही में आई 'नाइट फ्रैंक' (Knight Frank) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि भारत में अमीरों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2031 तक दुनिया के हर 100 अमीरों में से 8 भारतीय होंगे। यह आंकड़ा न केवल भारत की बढ़ती Purchasing Power को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि ग्लोबल वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन में भारत की हिस्सेदारी कितनी मजबूती से बढ़ रही है।
अल्ट्रा-रिच आबादी में भारी उछाल
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत वर्तमान में अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (UHNWIs) यानी उन लोगों की सूची में छठे स्थान पर है, जिनके पास करोड़ों की संपत्ति है। लेकिन असली बदलाव आने वाले 5-6 सालों में दिखने वाला है। अनुमान है कि 2031 तक भारत में अरबपतियों की संख्या में 300% से भी ज्यादा का इजाफा हो सकता है। यह विकास दर दुनिया के कई विकसित देशों के मुकाबले कहीं अधिक है। भारत की युवा आबादी, बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश इस संपत्ति सृजन (Wealth Creation) के मुख्य इंजन हैं।
किन क्षेत्रों से पैदा हो रही है दौलत?
भारत में केवल पारंपरिक व्यापार ही नहीं, बल्कि नए जमाने के टेक्नोलॉजी और डिजिटल बिजनेस भी नए अमीर पैदा कर रहे हैं। शेयर बाजार में रिकॉर्ड बढ़त, रियल एस्टेट सेक्टर में उछाल और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत का उभरना, मध्यम वर्ग को उच्च वर्ग की ओर धकेल रहा है। इसके अलावा, भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों से भी अब करोड़पतियों की फौज निकल रही है, जो पहले केवल मुंबई या दिल्ली जैसे महानगरों तक सीमित थी। रिपोर्ट बताती है कि भारतीय अब विलासिता (Luxury) की वस्तुओं, विदेशी निवेश और प्राइम रियल एस्टेट पर खर्च करने में दुनिया में सबसे आगे निकल रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर भारत का दबदबा
आज से एक दशक पहले तक, रईसों की लिस्ट में अमेरिका, चीन और यूरोपीय देशों का दबदबा रहता था। लेकिन अब समीकरण बदल रहे हैं। 2031 का अनुमान बताता है कि वैश्विक अमीरों की आबादी में भारत की हिस्सेदारी 8% हो जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि दुनिया भर की लग्जरी कार कंपनियां, बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स और इंटरनेशनल बैंक अब अपना पूरा ध्यान भारत पर केंद्रित कर रहे हैं। भारत अब केवल एक 'उपभोक्ता बाजार' नहीं रहा, बल्कि 'पूंजी का स्रोत' भी बनता जा रहा है।
आर्थिक असमानता की चुनौती
अमीरों की बढ़ती संख्या देश के लिए गर्व की बात तो है, लेकिन यह एक बड़ी चुनौती की ओर भी इशारा करती है वह है आर्थिक असमानता। जहां एक तरफ भारत के रईस दुनिया पर राज करने की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी तरफ मध्यम और निचले वर्ग की आय में उतनी तेजी से वृद्धि सुनिश्चित करना सरकार के लिए एक टास्क होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बढ़ती दौलत का लाभ समाज के निचले स्तर तक पहुंचे, तो भारत वास्तव में एक विकसित राष्ट्र (Viksit Bharat) बनने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
