न डॉलर से जंग, न नई करेंसी! जानिए क्या है भारत का BRICS डिजिटल पेमेंट प्लान?

भारत BRICS देशों की डिजिटल करेंसी (CBDC) को आपस में जोड़ने का प्रयास कर रहा है ताकि सीमा पार व्यापार आसान हो सके, लेकिन राजनीतिक मतभेद और तकनीकी चुनौतियां इसमें मुख्य बाधाएं हैं।

भारत BRICS (ब्रिक्स) देशों के बीच आपसी व्यापार और लेनदेन को आसान बनाने के लिए सदस्य देशों की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को आपस में जोड़ने की जोरदार वकालत कर रहा है। नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान यह प्रस्ताव प्रमुखता से एजेंडे में शामिल है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का मुख्य उद्देश्य सीमा पार भुगतानों (cross-border payments) को तेज, पारदर्शी और सस्ता बनाना है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि BRICS देशों के बीच जारी राजनीतिक खींचतान और तकनीकी कमियों के कारण इस दिशा में बहुत तेज प्रगति होना मुश्किल दिखता है।

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BRICS देशों की डिजिटल करेंसी जोड़ने में भारत आगे (तस्वीर-AI)

क्या है भारत का मुख्य प्रस्ताव?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने BRICS देशों के आधिकारिक डिजिटल भुगतानों को आपस में जोड़ने की योजना बनाई है। यह पहल साल 2025 में रियो डी जनेरियो में हुए ब्रिक्स सम्मेलन की घोषणा पर आधारित है, जिसमें सदस्य देशों के पेमेंट सिस्टम को एक-दूसरे के अनुकूल बनाने पर जोर दिया गया था। भारत का लक्ष्य वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर (USD) को रिप्लेस करना नहीं है, बल्कि अपने व्यापारिक संबंधों को गति देना और वित्तीय लागत को कम करना है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो BRICS देशों के व्यापारी और नागरिक बिना किसी परेशानी के अपनी डिजिटल करेंसी के जरिए एक-दूसरे को सीधा भुगतान कर सकेंगे।

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