HSBC India Manufacturing PMI December 2025 मंथली रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दिसंबर के दौरान ग्रोथ मोमेंटम साफ तौर पर कमजोर पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 के कैलेंडर ईयर का अंत आउटपुट, ऑर्डर और सेंटिमेंट जैसे कई प्रमुख संकेतकों में ग्रोथ की रफ्तार धीमी होने के साथ हुआ।
पीएमआई की ग्रोथ रुकी। (इमेज क्रेडिट, ओपन एआई)
नए ऑर्डर और आउटपुट की रफ्तार घटी
दिसंबर में मैन्युफैक्चरर्स को नए ऑर्डर और आउटपुट में बढ़ोतरी जरूर मिली, लेकिन इसकी स्पीड पहले के मुकाबले कम रही। फैक्ट्रियों में नया बिजनेस दिसंबर 2023 के बाद सबसे धीमी दर से बढ़ा, जबकि आउटपुट ग्रोथ अक्टूबर 2022 के बाद सबसे कमजोर स्तर पर आ गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कुछ प्रोडक्ट्स की कमजोर मांग इसका बड़ा कारण रही, हालांकि घरेलू मांग ने कुल गतिविधियों को सहारा दिया।
एक्सपोर्ट डिमांड में ठंडक
निर्यात ऑर्डर में बढ़ोतरी तो हुई, लेकिन यह 14 महीनों की सबसे धीमी रफ्तार रही। कंपनियों ने बताया कि एक्सपोर्ट ग्रोथ मुख्य रूप से एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट से आई, जबकि ज्यादा इंटरनेशनल सेल्स दर्ज करने वाली कंपनियों का अनुपात तेजी से घटा। यह ओवरसीज डिमांड में लगातार सुस्ती का संकेत है।
हायरिंग और इनपुट खरीद में कटौती
ग्रोथ धीमी पड़ने के साथ कंपनियों ने हायरिंग और इनपुट खरीद पर भी ब्रेक लगाया। दिसंबर में रोजगार बढ़ोतरी मामूली रही और यह मौजूदा 22 महीने के एक्सपेंशन फेज में जॉब क्रिएशन की सबसे धीमी गति रही। इनपुट खरीद भी दो साल की सबसे कमजोर दर से बढ़ी, क्योंकि कंपनियां डिमांड को लेकर सतर्क बनी रहीं।
महंगाई का दबाव नहीं
दिसंबर में कॉस्ट प्रेशर काफी सीमित रहे। इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी ऐतिहासिक रूप से बेहद कम रही, जो 2025 के सबसे निचले स्तरों में शामिल है। बांस, केमिकल्स, ग्लास, लेदर और पैकेजिंग जैसी कुछ चीजों की कीमतें बढ़ीं, लेकिन कुल मिलाकर दबाव कम रहा। वहीं आउटपुट प्राइस इंफ्लेशन घटकर नौ महीने के निचले स्तर पर आ गया।
बिजनेस कॉन्फिडेंस धड़ाम
हालांकि कंपनियों को 2026 में आउटपुट बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन कुल बिजनेस सेंटिमेंट कमजोर हुआ। दिसंबर में भरोसा करीब साढ़े तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। कंपनियों ने प्रतिस्पर्धी दबाव और बाजार की अनिश्चितता को मुख्य चिंता बताया।
FAQs
PMI क्या होता है?
PMI यानी Purchasing Managers’ Index एक प्रमुख आर्थिक संकेतक है, जो मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की मौजूदा सेहत को मापता है। यह सर्वे खरीद प्रबंधकों से मिले डेटा पर आधारित होता है, जिसमें आउटपुट, नए ऑर्डर, रोजगार, इनपुट कॉस्ट और डिलीवरी टाइम जैसे फैक्टर्स शामिल रहते हैं।
PMI क्यों अहम होता है?
PMI अर्थव्यवस्था की दिशा का सबसे शुरुआती संकेत देता है। सरकार, RBI, निवेशक और कंपनियां इसी डेटा से यह समझने की कोशिश करती हैं कि ग्रोथ तेज हो रही है या सुस्त पड़ रही है। GDP जैसे बड़े आंकड़ों से पहले PMI ट्रेंड बाजार को अलर्ट कर देता है।
PMI डेटा कौन जारी करता है?
भारत में मैन्युफैक्चरिंग PMI का डेटा S&P Global द्वारा जारी किया जाता है, जिसे HSBC India Manufacturing PMI के नाम से प्रकाशित किया जाता है।
PMI डेटा कब जारी होता है?
PMI डेटा हर महीने जारी किया जाता है। आमतौर पर पहले फ्लैश या प्रारंभिक आंकड़े आते हैं, जिसके बाद रिवाइज्ड या फाइनल डेटा जारी किया जाता है।
PMI को कैसे पढ़ें ?
PMI स्केल में 50 सबसे अहम स्तर माना जाता है। 50 से ऊपर का आंकड़ा बताता है कि सेक्टर विस्तार कर रहा है। 50 से नीचे का आंकड़ा सेक्टर के सिकुड़ने का संकेत देता है। अगर PMI 50 के आसपास रहता है, तो इसका मतलब है कि गतिविधियों में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं हो रहा।
