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रक्षा क्षेत्र में भी 'Make In India' का दम, स्वीडन की इस बड़ी डिफेंस कंपनी को 100 फीसदी FDI की मंजूरी

  • Authored by: आशीष कुशवाहा
  • Updated Nov 5, 2023, 09:51 AM IST

India First 100% FDI in defence sector: भारत अभी तक रक्षा क्षेत्र में 74% तक एफडीआई की अनुमति देता था। हालांकि 2015 में मंजूरी नियमों में ढील दी गई थी, लेकिन अब तक कोई भी विदेशी कंपनी रक्षा क्षेत्र में 100% एफडीआई की अनुमति नहीं ले पाई थी।

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बेहद घातक हथियार कार्ल-गुस्ताफ एम4 सिस्टम

Photo : Twitter

India First 100% FDI in defence sector: भारत ने रक्षा क्षेत्र में देश के पहल पहले 100 फीसदी वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ( एफडीआई ) को मंजूरी दे दी है। यह पहल स्वीडन (Sweden) की बड़ी डिफेंस कंपनी साब (SAAB) के शुरू हुई है जो रॉकेट बनाने का काम करेगी। ईटी के मुताबिक 500 करोड़ रुपये से कम मूल्य के एफडीआई का प्रस्ताव को पिछले महीने ही मंजूरी मिल चुकी है।

पहले रक्षा क्षेत्र में कितनी थी एफडीआई की अनुमति

भारत अभी तक रक्षा क्षेत्र में 74% तक एफडीआई की अनुमति देता था। हालांकि 2015 में मंजूरी नियमों में ढील दी गई थी, लेकिन अब तक कोई भी विदेशी कंपनी रक्षा क्षेत्र में 100% एफडीआई की अनुमति नहीं ले पाई थी। ऐसे में साब एफएफवी इंडिया, को पहली बार 100 फीसदी एफडीआई के साथ चुना गया है। यह भारत में बेहद घातक हथियार कार्ल-गुस्ताफ एम4 सिस्टम की नई पीढ़ी बनाएगी। इस वेपन सिस्टम (Weapon System) का निर्माण, साब (SAAB) की नई सब्सिडियरी कंपनी साब एफएफवी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। इस तरह अब रक्षा क्षेत्र में भी 'Make In India' का दम देखने को मिलेगा।

कंधे से दागे जाने वाले रॉकेट

हरियाणा में स्थापित होने वाली इस सुविधा में कार्ल-गुस्ताफ प्रणाली के लिए साइटिंग तकनीक और कार्बन फाइबर वाइंडिंग सहित मॉर्डन टेक्नोलॉजी शामिल होंगी। कंधे से दागे जाने वाले रॉकेट पहले से ही भारतीय सशस्त्र बलों बड़ी मात्रा में उपयोग में हैं और स्थानीय उत्पादन शुरू होने के बाद इन्हें निर्यात भी किया जा सकता है। जिसका निर्माण अगले साल शुरू होगा।

100% FDI की मंजूरी लेने वाली पहली विदेशी कंपनी

कंधे से लॉन्च की जाने वाली हथियार प्रणाली का उपयोग अमेरिकी, यूरोपीय और भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किया जाता है और इसका उपयोग दुश्मन के मजबूत ठिकानों, कवच और कर्मियों को नष्ट करने के लिए किया जाता है। 2016 में, फ्रांसीसी फर्म DCNS मॉर्डन सिस्टम विकसित करने के लिए एक भारतीय सहायक कंपनी स्थापित करने के लिए 100% FDI की मंजूरी लेने वाली पहली विदेशी कंपनी बन गई, जो पनडुब्बियों को पानी के नीचे अधिक सहनशक्ति प्रदान करेगी। इसने उच्च स्तरीय महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए डीसीएनएस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में ₹100 करोड़ से अधिक के निवेश की मंजूरी मांगी थी, लेकिन उसे अपेक्षित अनुमति नहीं मिली।

आशीष कुशवाहा
आशीष कुशवाहाauthor

<p>आशीष कुमार कुशवाहा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। वह 2023 से Timesnowhindi.com के साथ जुड़े हैं। वह यहां शेयर बाजार, स्टॉक्स, IPO, पर्सनल फाइनेंस, बिजनेस न्यूज, कंपनी डेवलपमेंट, सक्सेस स्टोरी, यूटिलिटी, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और गैजेट से जुड़ी स्टोरी पर काम करते हैं। उनके पास पिछले 3 साल के भारतीय बजट को भी कवर करने का एक्सपीरियंस है। उनके पास ऑटो एक्सपो 2023 को कवर करने का अनुभव है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया में कुल 3 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है। इससे पहले इन्होंने वन इंडिया, दैनिक भास्कर डिजिटल में काम किया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से मास कम्यूनिकेशन में की है। उन्हें शुरू से ही डिबेट करने, सामाजिक मुद्दों पर बात करने और शेयर बाजार में रुचि थी। उन्हें बचपन से ही अखबार के संपादकीय पेज और न्यूज पढ़ने का सौख था। स्कूल के समय उन्होंने कई क्विज कंपटीशन में भी हिस्सा लिया और प्राइज जीते हैं।</p>

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