Old Tax Regime Benefits: वित्तीय वर्ष 2024-25 समाप्त हो चुका है और आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन शुरू हो गया है। टैक्सपेयर्स के पास 31 जुलाई तक अपने रिटर्न दाखिल करने के लिए लगभग तीन महीने का समय है। इस दौरान, टैक्सपेयर्स को पुरानी और नई टैक्स रिजीम के बीच किसी एक का चयन करना होगा। नई रिजीम में कम टैक्स स्लैब आकर्षक हैं, जबकि पुरानी रिजीम में छूट और कटौती के लाभ हैं। आइए जानते हैं, किन परिस्थितियों में पुरानी टैक्स रिजीम बेहतर है।
4 मामलों में पुरानी टैक्स रिजीम नई टैक्स रिजीम से बेहतर
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टैक्स-फ्री निवेश पर छूट का फायदा
पुरानी टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स धारा 80C, 80D, 80G, और 80DD के तहत विभिन्न निवेशों और खर्चों पर आयकर छूट का क्लेम कर सकते हैं। यदि आपने इन प्रावधानों के तहत निवेश किया है, तो पुरानी रिजीम चुनना आपके लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि यह टैक्स बचत को अधिकतम करता है।
दूसरी ओर नई टैक्स रिजीम में छूट सीमित हैं। केवल धारा 80CCD(2), 80CCH, और 80JJAA के तहत कुछ विशेष छूट उपलब्ध हैं।
मकान किराया भत्ता (HRA) छूट
पुरानी टैक्स रिजीम में सैलेरीड पर्सन धारा 10(13A) के तहत मकान किराया भत्ता (HRA) छूट का लाभ उठा सकते हैं, जो टैक्सेबल इनकम को काफी कम करता है। यह छूट नई टैक्स रिजीम में उपलब्ध नहीं है। यदि आप HRA छूट के एलिजिबल हैं, तो पुरानी रिजीम आपके लिए अधिक फायदेमंद होगी, क्योंकि यह आपकी टैक्सेबल इनकम को कम करने में मदद करती है।
उच्चतम टैक्स रेट पर पुरानी टैक्स रिजीम
पुरानी टैक्स रिजीम में 10 लाख रुपये से अधिक आय पर 30% की उच्चतम टैक्स रेट लागू होती है, जबकि नई रिजीम में यह दर 15 लाख रुपये से अधिक आय पर लागू होती है। यदि आप उच्चतम टैक्स ब्रैकेट में हैं, तो नई रिजीम चुनने का कोई अतिरिक्त प्रोत्साहन नहीं है। इस मामले में पुरानी टैक्स रिजीम आपके लिए अधिक उपयुक्त हो सकती है।
इनकम टैक्स कैलकुलेटर का उपयोग करें
टैक्स रिजीम चुनने से पहले इनकम टैक्स कैलकुलेटर का उपयोग करें। यह दोनों रिजीम के तहत टैक्स की कैलकुलेशन करता है और आपको वह विकल्प चुनने में मदद करता है, जिसमें टैक्स कम लगता है। यह एक आसान तरीका है, जिससे आप सही फैसला ले सकते हैं।
