Income Tax News: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैक्स चोरी रोकने और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग विभिन्न देशों के साथ साझा की जाने वाली वित्तीय जानकारी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए वित्तीय क्षेत्र के नियामकों के साथ जल्द ही महत्वपूर्ण चर्चा करेगा। इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य खाता खोलने के नियमों को अधिक व्यावहारिक और सटीक बनाना है, ताकि वैश्विक समझौतों के तहत मिलने वाली जानकारी में किसी भी तरह की त्रुटि की गुंजाइश न रहे।
आयकर विभाग और वित्तीय नियामकों की नई पहल: खाता खोलने के नियमों में हो सकते हैं बदलाव
क्यों जरूरी हैं नियमों में बदलाव?
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक इनकम टैक्स विभाग के प्रधान महानिदेशक (खुफिया एवं अपराध जांच) देवज्योति दास के अनुसार, विभाग जल्द ही वित्तीय नियामकों के साथ बैठक करेगा। इस बैठक में उनसे खाता खोलने की मौजूदा औपचारिकताओं और आवश्यकताओं में बदलाव करने का अनुरोध किया जाएगा। ऐसा इसलिए जरूरी है ताकि भारत अपने अंतरराष्ट्रीय सूचना साझा करने के दायित्वों को पूरी सटीकता और जिम्मेदारी के साथ पूरा कर सके।
विदेशी लेनदेन की जानकारी देने की इस प्रक्रिया में कई तरह की नियामकीय आवश्यकताएं शामिल होती हैं। इनमें मुख्य रूप से विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम (FATCA), साझा रिपोर्टिंग मानक (CRS) और धन शोधन रोधक अधिनियम (PMLA) के प्रावधान शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि साझा किए जाने वाले डेटा की गुणवत्ता इस बात पर पूरी तरह निर्भर करती है कि वित्तीय संस्थान जब ग्राहक का खाता खोलते हैं, तो वे कौन-कौन से आंकड़े और दस्तावेज एकत्र करते हैं।
वित्तीय संस्थानों से मांगे जा रहे हैं सुझाव
आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का पता लगाने के लिए आयकर विभाग लगातार सक्रिय है। इसके लिए विभाग बैंकों, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थानों से सीधे सुझाव मांग रहा है ताकि यह आकलन किया जा सके कि मौजूदा नियमों में बदलाव करने की कितनी आवश्यकता है। अधिकारियों का कहना है कि जब अन्य देशों के साथ रिपोर्ट साझा की जाती है, तो उनमें जो थोड़ी-बहुत कमियां या खामियां पाई जाती हैं, उनमें से 97 से 98 प्रतिशत समस्याएं केवल करदाता पहचान संख्या (TIN) से जुड़ी होती हैं। इन कमियों में मुख्य रूप से टीआईएन का फॉर्म में दर्ज न होना, गलत प्रारूप में लिखा जाना या वास्तविक पहचान संख्या से उसका मेल न खाना शामिल है।
विदेशी निवेशकों पर लागू होते हैं ये प्रावधान
यह स्पष्ट करना बहुत जरूरी है कि रिपोर्टिंग से जुड़े ये तमाम प्रावधान मुख्य रूप से भारत में निवेश करने वाले विदेशी नागरिकों और संस्थाओं पर लागू होते हैं, न कि विदेशों में निवेश करने वाले भारतीय नागरिकों पर। अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि इसका यह कतई मतलब नहीं है कि विदेशी निवेशकों द्वारा जमा की गई 97 प्रतिशत रिपोर्टें पूरी तरह गलत होती हैं। वास्तव में गलत रिपोर्टों की संख्या काफी कम है, और उन कुछेक गलत रिपोर्टों में भी 97 प्रतिशत खामियां केवल टीआईएन के स्तर पर ही पाई जाती हैं। हालांकि, हर साल इन कमियों का प्रतिशत लगातार घट रहा है, लेकिन भारत में जैसे-जैसे अधिक विदेशी नागरिक और कंपनियां निवेश कर रही हैं, वैसे-वैसे कुल रिपोर्टों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है।
जागरूकता और कर्मचारियों का प्रशिक्षण
डेटा संग्रह और उसकी रिपोर्टिंग प्रक्रिया में और अधिक सुधार लाने के लिए आयकर विभाग केवल नियमों में बदलाव तक सीमित नहीं है। विभाग की ओर से अनुपालन अधिकारियों, ग्राहक संबंध प्रबंधकों (RM) और बैंक या वित्तीय संस्थानों में खाता खोलने का काम देखने वाले कर्मचारियों के लिए विशेष जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं और इन्हें आगे भी जारी रखा जाएगा।
प्रवर्तन के बजाय सहयोगात्मक दृष्टिकोण
कानून के पालन और प्रवर्तन के मुद्दे पर विभाग का रुख बेहद स्पष्ट और सकारात्मक है। देवज्योति दास ने कहा कि आयकर विभाग हमेशा एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण का समर्थन करता है। विभाग का मानना है कि वित्तीय नियमों के तहत जुर्माना जैसी कड़ी कार्रवाई मुख्य रूप से केवल उन्हीं मामलों में की जानी चाहिए जहाँ जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया गया हो, न कि छोटी-मोटी और अनजाने में हुई तकनीकी गलतियों पर।
