भारत में पेट्रोल और डीजल (Petrol Diesel Price) की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार पर ही निर्भर नहीं करतीं, बल्कि इसमें राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले स्थानीय करों (VAT) और माल ढुलाई के खर्च का भी बड़ा हाथ होता है। यही वजह है कि एक ही देश में होने के बावजूद, एक राज्य से दूसरे राज्य की सीमा पार करते ही तेल की कीमतों में ₹10 से ₹15 तक का अंतर देखने को मिलता है। ताजा अपडेट के अनुसार, देश के कुछ राज्यों में पेट्रोल की कीमतें ₹113 प्रति लीटर और डीजल ₹101 प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी हैं, जिसने वहां के नागरिकों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
राजस्थान और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मार
अगर हम भारत के सबसे महंगे ईंधन वाले राज्यों की बात करें, तो राजस्थान और महाराष्ट्र इस सूची में सबसे ऊपर आते हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे जिलों में परिवहन खर्च अधिक होने और राज्य सरकार के उच्च वैट (VAT) के कारण पेट्रोल की कीमतें ₹113 प्रति लीटर के स्तर को छू रही हैं। इसी तरह, महाराष्ट्र के कई शहरों में भी पेट्रोल ₹110 के पार बिक रहा है। दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना भी उन राज्यों में शामिल हैं जहाँ ईंधन की दरें राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक हैं।
क्यों है कुछ राज्यों में तेल इतना महंगा?
इस भारी अंतर की मुख्य वजह 'वैट' (Value Added Tax) है। केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी लगाती है जो पूरे देश में समान होती है, लेकिन हर राज्य अपनी वित्तीय जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग प्रतिशत में वैट वसूलता है। उदाहरण के लिए, जहाँ अंडमान-निकोबार या पोर्ट ब्लेयर में टैक्स कम होने की वजह से पेट्रोल ₹85-90 के आसपास मिल सकता है, वहीं राजस्थान या बिहार जैसे राज्यों में टैक्स की ऊंची दरों के कारण यह ₹100 के काफी ऊपर चला जाता है। इसके अलावा, रिफाइनरी से दूरी और दुर्गम इलाकों में माल पहुंचाने का खर्च भी अंतिम कीमत को बढ़ा देता है।
आम जनता पर पड़ रहा है दोहरा असर
जिन राज्यों में पेट्रोल और डीजल महंगा है, वहां के लोगों को न केवल निजी वाहन चलाने में दिक्कत हो रही है, बल्कि महंगाई का दोहरा असर झेलना पड़ रहा है। डीजल महंगा होने से ट्रकों का भाड़ा बढ़ जाता है, जिससे अनाज, फल और सब्जियों की कीमतें अपने आप बढ़ जाती हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग अक्सर कम कीमतों की तलाश में पड़ोसी राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के पेट्रोल पंपों का रुख करते हैं, जो स्थानीय पेट्रोल पंप मालिकों के लिए भी घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
क्या भविष्य में मिलेगी राहत?
लंबे समय से यह मांग उठ रही है कि पेट्रोल और डीजल को भी जीएसटी (GST) के दायरे में लाया जाए। यदि ऐसा होता है, तो पूरे देश में तेल की कीमतें एक समान हो सकती हैं और मौजूदा कीमतों में ₹20 से ₹30 तक की कमी आ सकती है। हालांकि, राज्यों की आय का एक बड़ा हिस्सा पेट्रोल पर लगने वाले टैक्स से आता है, इसलिए अधिकांश राज्य इसे जीएसटी में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं। फिलहाल, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ही आम आदमी के लिए एकमात्र उम्मीद की किरण नजर आती है।
