Illegal Loan Recovery: बैंक ग्राहकों के अधिकारों और उनकी जमा पूंजी की सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बैंच ने एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को कड़ा झटका देते हुए एक पीड़िता को 20.9 लाख रुपये (ब्याज सहित) लौटाने का निर्देश दिया है। बैंक ने महिला के दिवंगत पति के बकाया लोन की वसूली के लिए उसकी खुद की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से पैसे काट लिए थे। कोर्ट ने बैंक की इस कार्रवाई को पूरी तरह से गैर-कानूनी, मनमाना और बैंकिंग नियमों का उल्लंघन माना है।
पति के लोन की भरपाई पत्नी की FD से? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने SBI की 'चालाकी' पर लगाई तगड़ी क्लास (तस्वीर-AI)
क्या है पूरा मामला?
लखनऊ के एक अस्पताल में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत व्यक्ति ने 3 नवंबर 2020 को एसबीआई से 15 लाख रुपये का एक्सप्रैस क्रेडिट पर्सनल लोन लिया था। इस लोन के लिए उन्होंने 8,803 रुपये का प्रीमियम देकर बीमा भी कराया था। मई 2021 में कोविड-19 के कारण उनकी दुखद मृत्यु हो गई। पति के निधन के बाद बैंक ने उनकी पत्नी से लोन चुकता करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। सितंबर 2025 में बैंक ने महिला को लीगल नोटिस भेजकर 13.87 लाख रुपये की मांग की और उनका सैलरी अकाउंट होल्ड पर रख दिया। हालांकि, आरबीआई ओम्बड्समैन (लोकपाल) से शिकायत के बाद सैलरी अकाउंट से रोक हटा ली गई थी।
बैंक ने कैसे काटे 19.9 लाख रुपये?
जब दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल ही रही थी, तब एसबीआई ने बेहद चालाकी से महिला के नाम पर दर्ज एफडी को इनकैश कर लिया। महिला की यह एफडी आशियाना शाखा में थी, जिसे बैंक ने पहले जानकीपुरम शाखा स्थानांतरित किया। जहां से पति ने लोन लिया था। इसके बाद एफडी से 19,90,693 रुपये काटकर पति के लोन खाते में जमा कर दिए गए और खाता वापस आशियाना शाखा भेज दिया गया। महिला इस लोन प्रक्रिया में न तो सह-आवेदक (Co-borrower) थीं, न ही गारंटर या नॉमिनी।
हाई कोर्ट का कड़ा रुख और टिप्पणी
जस्टिस शेखर बी सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बैंच ने एसबीआई की इस कार्यशैली पर सख्त नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि महिला और बैंक के बीच लोन को लेकर कोई कानूनी कॉन्ट्रैक्ट नहीं था। एफडी अकाउंट को एक ब्रांच से दूसरी ब्रांच में ट्रांसफर करके पैसे काटने का तरीका बैंक की बद नियती को दर्शाता है। कोर्ट ने इसे बैंकिंग परंपराओं के खिलाफ और ग्राहकों के विश्वास पर एक गंभीर प्रहार करार दिया।
बैंक का पक्ष और अदालत का जवाब
एसबीआई ने दलील दी कि लोन लेते समय पति ने एक फॉर्म पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत बैंक को कुछ परिस्थितियों में फंड और सैलरी खाते से वसूली का अधिकार था। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर किसी अलग व्यक्ति (पत्नी) के निजी खाते से पैसा नहीं लिया जा सकता। वैधानिक उत्तराधिकारी से लोन वसूली का एक तय कानूनी तरीका होता है, न कि इस तरह की जबरन कार्रवाई।
SBI पर लगा 1 लाख का जुर्माना, पूरा पैसा लौटाने का हुक्म
कोर्ट ने एसबीआई को आदेश दिया है कि वह महिला के खाते से काटे गए 19,90,693 रुपये चार सप्ताह के भीतर वापस करे। साथ ही, इस रकम पर एफडी की तय दरों के हिसाब से ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा, महिला को मानसिक प्रताड़ना देने और उनके अधिकारों का हनन करने के लिए बैंक पर 1 लाख रुपये का दंडात्मक मुआवजा भी लगाया गया है। इस तरह बैंक को कुल 20.9 लाख रुपये (ब्याज अलग से) महिला को लौटाने होंगे।
