शेयरों पर टैक्स बचाने का मास्टर तरीका, निवेशक कर रहे जमकर इस्तेमाल

शेयर मार्केट में कमाई करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उस कमाई पर लगने वाले टैक्स को कम करना। कई बार बिना प्लानिंग के शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने पर बड़ा टैक्स देना पड़ जाता है। लेकिन एक स्मार्ट रणनीति है, जिससे आप हर साल 1 लाख रुपये तक का टैक्स पूरी तरह बचा सकते हैं वो भी बिल्कुल कानूनी तरीके से। जानिए ये तरीका कैसे काम करता है और निवेशकों में क्यों तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

भारत में पिछले कुछ सालों में निवेश करने का तरीका तेजी से बदला है। पहले लोग ज्यादातर फिक्स्ड डिपॉजिट या पारंपरिक योजनाओं में पैसा लगाते थे, लेकिन अब नई पीढ़ी यानी जेनजेड और मिलेनियल्स का झुकाव इक्विटी, म्यूचुअल फंड और ETF की ओर बढ़ रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म की वजह से निवेश करना आसान हुआ है और अच्छे रिटर्न की उम्मीद भी बढ़ी है। लेकिन जैसे-जैसे निवेश बढ़ता है, वैसे-वैसे उस पर लगने वाले टैक्स को समझना भी जरूरी हो जाता है। कई नए निवेशकों को नहीं पता होता कि शेयर या म्यूचुअल फंड के मुनाफे पर अलग तरह के टैक्स लगते हैं जैसे लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स। गलत समय पर बेचने से आपका रिटर्न काफी कम हो सकता है।

Mutual Fund

क्या है टैक्स हार्वेस्टिंग?

इसी बीच एक रणनीति बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रही है टैक्स हार्वेस्टिंग। यह एक कानूनी, स्मार्ट और बिना किसी अतिरिक्त जोखिम वाला तरीका है जिससे निवेशक हर साल काफी टैक्स बचा सकते हैं। टैक्स हार्वेस्टिंग में आप अपने निवेश पर हुए कुछ लाभ को हर वित्तीय वर्ष टैक्स फ्री सीमा तक "साकार" कर लेते हैं। भारत में इक्विटी पर 1 लाख रुपये तक का दीर्घकालिक लाभ टैक्स फ्री है। मतलब, अगर आपके शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड का लाभ एक साल में 1 लाख के अंदर है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा।

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