आज के समय में हर कोई अपनी नियमित आमदनी के साथ-साथ पैसिव इनकम (Passive Income) यानी कमाई का एक ऐसा जरिया चाहता है, जिसमें ज्यादा मेहनत न करनी पड़े और हर महीने एक तय रकम सीधे बैंक खाते में आती रहे। अगर आपके पास भी शहर या किसी मुख्य इलाके में एक खाली प्लॉट है या आपके घर की छत खाली पड़ी है, तो आपके लिए कमाई का एक शानदार मौका हो सकता है। आजकल देश में 5G नेटवर्क का विस्तार बहुत तेजी से हो रहा है, जिसके कारण टेलीकॉम कंपनियों को सिग्नल कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए जगह-जगह नए मोबाइल टावर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे में कंपनियां मकान मालिकों की खाली छतों या जमीनों को किराये पर ले रही हैं। अगर आपका घर किसी प्राइम लोकेशन या ऐसे क्षेत्र में है जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर है, तो आप अपनी खाली छत पर मोबाइल टावर लगवाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बदले टेलीकॉम कंपनियां आपको हर महीने हजारों से लेकर 1 लाख रुपये तक का मोटा किराया दे सकती हैं, जो आपकी लोकेशन और टावर के प्रकार पर निर्भर करता है।
कैसे मोबाइल टावर से होगी कमाई?
मोबाइल टावर लगवाने की प्रक्रिया को लेकर आम लोगों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं कि इसके लिए किससे संपर्क किया जाए। आपको बता दें कि एयरटेल, जियो या वोडाफोन-आइडिया जैसी कंपनियां सीधे आपके घर आकर टावर नहीं लगाती हैं। इसके लिए कुछ अधिकृत इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां होती हैं, जैसे इंडस टावर्स (Indus Towers), अमेरिकन टावर कॉरपोरेशन (ATC) और समिट डिजिटल, जो मोबाइल टावर लगाने और उनकी देखरेख का काम संभालती हैं। अगर आप टावर लगवाना चाहते हैं, तो आपको इन कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन के दौरान आपको अपने नाम, मोबाइल नंबर के साथ अपनी संपत्ति की पूरी डिटेल जैसे- कुल स्पेस (वर्ग फुट में), सटीक लोकेशन और प्रॉपर्टी के प्रकार (कमर्शियल या रेसिडेंशियल) की जानकारी देनी होती है। आवेदन मिलने के बाद, कंपनियां अपनी तकनीकी टीम को आपके क्षेत्र में सर्वे के लिए भेजती हैं। अगर उनके सर्वे में यह पाया जाता है कि उस इलाके में नेटवर्क की कमी है और आपकी छत टावर का वजन उठाने के लिए मजबूत है, तो वे आपसे संपर्क कर आगे की कागजी कार्रवाई शुरू करती हैं।
क्या हैं नियम?
छत पर मोबाइल टावर लगवाने के लिए कुछ कड़े सरकारी नियम और शर्तों का पालन करना अनिवार्य होता है। सबसे पहली शर्त यह है कि आपके पास उस प्रॉपर्टी के मालिकाना हक के पक्के दस्तावेज होने चाहिए। इसके अलावा, आपको स्थानीय नगर निगम, नगरपालिका या ग्राम पंचायत से 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' यानी एनओसी (NOC) लेना होता है। सुरक्षा के लिहाज से कंपनियों को यह भी देखना होता है कि टावर लगाने से आसपास के लोगों को कोई खतरा न हो। यदि आपकी प्रॉपर्टी किसी सोसाइटी या घनी आबादी वाले क्षेत्र में है, तो पड़ोसियों या सोसाइटी वेल्फेयर एसोसिएशन (RWA) से भी लिखित सहमति लेनी पड़ सकती है। स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट भी बेहद जरूरी होता है, जो यह प्रमाणित करता है कि टावर लगने के बाद भी आपकी बिल्डिंग पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। इन सभी कानूनी और तकनीकी मानकों के पूरा होने के बाद ही कंपनियों के साथ 10 से 15 साल का एक रेंटल एग्रीमेंट (किरायानामा) साइन होता है, जिसमें हर साल किराये में होने वाली बढ़ोतरी की शर्तें भी साफ-साफ लिखी होती हैं।
कितनी और कैसे होगी कमाई?
इस बिजनेस में कमाई की संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं, लेकिन इसके साथ ही बाजार में मोबाइल टावर के नाम पर होने वाले फ्रॉड (Fraud) और घोटालों से सावधान रहना भी बेहद जरूरी है। आजकल अखबारों और सोशल मीडिया पर कई फर्जी विज्ञापन देखने को मिलते हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि वे आपके घर पर टावर लगवा देंगे और बदले में लाखों रुपये एडवांस और सरकारी नौकरी देंगे। ऐसे जालसाज लोग खुद को टेलीकॉम मंत्रालय या बड़ी कंपनियों का अधिकारी बताकर रजिस्ट्रेशन फीस, सरकारी टैक्स या एनओसी शुल्क के नाम पर आपसे एडवांस पैसे की मांग करते हैं। आपको यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि कोई भी असली और वैध टेलीकॉम कंपनी टावर लगाने के लिए मकान मालिक से ₹1 भी एडवांस नहीं मांगती है। उल्टा कंपनी खुद आपको किराया और बिजली का खर्च देती है। इसलिए, किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइटों के जरिए ही आवेदन करें। सतर्क रहकर और सही कानूनी प्रक्रिया अपनाकर आप अपनी खाली छत को कमाई का एक बेहतरीन जरिया बना सकते हैं।
