Hormuz Crisis Explained: अमेरिका और ईरान में सीजफायर होने के बाद पूरी दुनिया में उम्मीद जगी थी कि अब युद्ध नहीं होगा और शांति बनी रहेगी। हालांकि, ऐसा होता नहीं दिख रहा है। ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर झूठा दावा करने का आरोप लगाते हुए एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया है। शानिवार को ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC/आईआरजीसी) की ओर से दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग की गई, जिससे उनको वापस लौटना पड़ा।
ईरान के नेताओं की ओर से ताजा बयान में कहा गया है कि उनकी अमेरिका के साथ बातचीत के लिए कोई तारीख तय नहीं हुई है। साथ ही उन्होंने कहा कि जबतक अमेरिका होर्मूज की घेराबंदी खत्म नहीं करता है, यह जलडमरूमध्य बंद रहेगा। ईरान के इस फैसले से एक बार फिर से कच्चे तेल से लेकर गैस का संकट बढ़ने की आशंका है। इसका व्यापक असर भारत पर होगा। आइए समझते हैं कि ईरान के इस ऐलान का भारतीय शेयर बाजार, सोने-चांदी की कीमत और रुपये पर,क्या असर होगा?
क्या हो सकता है भारतीय शेयर बाजार पर असर?
भारतीय शेयर बाज़ार ने छुट्टियों की वजह से छोटे रहे इस हफ्ते को मजबूती के साथ बंद किया। यह लगातार दूसरा हफ्ता था जब शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली, जिसकी मुख्य वजह भू-राजनीतिक चिंताओं में कमी और निवेशकों के बढ़ते भरोसे में सुधार था। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बनी उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिससे बाजार में तेजी लौटी। शुक्रवार के सत्र में निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में 1% से अधिक की बढ़त दर्ज की गई, और वे क्रमशः 24,353 और 78,493 के स्तर पर बंद हुए।
अब एक बार फिर होर्मूज बंद होने का असर सोमवार को बाजार पर दिखाई दे सकता है। मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि ईरान की इस कार्रवाई से सोमवार को भारतीय शेयर बाजार (Nifty और Sensex) पर दबाव दिख सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से Aviation, पेंट्स और Tyre कंपनियों के शेयरों में गिरावट आ सकती है, क्योंकि तेल इनके लिए मुख्य कच्चा माल है।
GIFT Nifty से क्या मिले संकेत: हालांकि शनिवार को शांति की खबरों से उछाल दिखा था, लेकिन रविवार की ताजा 'फायरिंग' की घटनाओं के बाद अब बाजार Gap-down (गिरावट के साथ) खुलने की आशंका बढ़ गई है। इसलिए निवेशकों को काफी सावधानी बरतने की जरूरत है।
कच्चा तेल में फिर लग सकती है आग
दुनिया का लगभग 20-25% तेल होर्मुज से गुजरता है। भारत भी अपनी जरूरत का बहुत सारा कच्चा तेल और गैस इस रूट से मंगाता है। एक बार फिर होर्मूज बंद होने से ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। तेल महंगा होने का मतलब है, भारतीय तेल कंपनियों का नुकसान बढ़ना। पहले ही तेल कंपनियां करीब 18 रुपये पेट्रोल पर और 35 रुपये डीजल पर नुकसान उठा रही है।
रुपये पर क्या होगा असर?
भारतीय रिजर्व बैंक के कदम उठाने से भारतीय रुपये में पिछले कुछ समय से रिकवरी लौटी थी लेकिन एक बार फिर से दबाब बढ़ सकता है। हाल ही में 27 मार्च को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.85 के निचले लेवल पर पहुंच गया था। इसके बाद आरबीआई ने रुपये में मजबूती लौटाने के लिए बैंकों के नेट ओपन फॉरेक्स पोजीशन पर कैप, बैंकों के कॉरपोरेट एनडीएफ ऑफरिंग पर रोक और ऑयल रिफाइनर्स के लिए स्पेशल फैसिलिटी जैसे उपाय किए। इन उपायों से रुपया मजबूत हुआ है। मार्च में यह डॉलर के मुकाबले 95 के पार चला गया था लेकिन उसके बाद इसमें 2.5 फीसदी तेजी आई है। एक बार फिर ईरान संकट बढ़ने से रुपये की रिकवारी पर ब्रेक लग सकता है।
सोने और चांदी की कीमत पर असर
जब भी दुनिया में युद्ध या तनाव बढ़ता है, तो लोग शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में निवेश करते हैं। हालांकि, इस बार ऐसा पहली बार नहीं हुआ। ईरान युद्ध के बीच में भी सोने और चांदी में गिरावट देखी गई। इसलिए सोमवार को सोने और चांदी में बड़ी तेजी की संभावना कम है। हां, सोने की कीमतों में ₹1,000 से ₹2,000 तक का उछाल आ सकता है। औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश के कारण चांदी की कीमत बढ़ सकती है।
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भारतीय इकोनॉमी पर क्या असर?
होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट' है, जहां से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है। यह वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा है। हाल के दिनों में इसके खुलने से भारत में तेल और गैस की आपूर्ति बढ़ी थी। लेकिन अब एक बार फिर बंद कर देने से तेल की सप्लाई पर असर होगा। इतना ही नहीं, कच्चे तेल की कीमत हाल के दिनों में गिरावट आई। इससे भारत के आयात बिल का बोझ कम हो रहा था। अब एक बार फिर तेल महंगा होने से भारत पर तेल आयात बिल का बोझ बढ़ेगा। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा करेगा। कई रेटिंग एजेंसी पहले ही ईरान युद्ध के चलते भारतीय जीडीपी ग्रोथ में कमी का अनुमान लगा चुके हैं।
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक बंद होने से तेल सप्लाई बाधित होगी, जिससे कीमतें फिर बढ़ेंगी, जिससे महंगाई बढ़ेगी और विकास दर पर दबाव आएगा। उर्वरक और खाद्य लागत बढ़ सकती है, क्योंकि भारत अपनी करीब 40% जरूरत मिडिल ईस्ट से आयात करता है। मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट, एविएशन और फूड सेक्टर पर सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा रहेगा।
मिडिल ईस्ट के साथ भारत का व्यापार भी अधिक है, जिससे जेम्स-ज्वेलरी, केमिकल, ऑटो और एल्युमिनियम सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। ट्रैवल और एयर कार्गो महंगे हो सकते हैं, जबकि रेमिटेंस पर भी असर पड़ सकता है। तेल की कीमत हर 10 डॉलर बढ़ने पर भारत की GDP 0.1-0.2% घट सकती है और महंगाई 0.2% बढ़ सकती है।
