हाथ में कितनी आएगी सैलरी? नौकरी ज्वाइन करने से पहले समझ लें ग्रॉस और नेट इनकम का ये फर्क

अक्सर नई नौकरी के ऑफर लेटर में सैलरी के आंकड़े हर किसी को खुश कर जाते हैं, लेकिन जब पहली बार बैंक अकाउंट में पैसा आता है, तो वह उम्मीद से कुछ कम जरूर लगता है। दरअसल, कंपनी जो कुल सैलरी (CTC) बताती है और जो पैसा आपकी जेब में आता है (In-hand Pay) उनके बीच पीएफ और टैक्स जैसी कई कटौतियों का एक बड़ा गणित छिपा होता है।

Gross Salary vs Net Salary: जब भी किसी नई नौकरी का ऑफर लेटर हाथ में आता है तो सबसे पहले नजर 'सैलरी' के आंकड़े पर ही जाती है। नई-नई नौकरी में अक्सर लोग ऑफर लेटर में लिखे कुल अमाउंट (CTC) को ही अपनी असल सैलरी मान बैठते हैं, लेकिन जब महीने के अंत में बैंक अकाउंट में पैसे आते हैं, तो वह रकम उम्मीद से कम होती है। इस तरह का कंफ्यूजन क्यों पैदा है? दरअसल, ऐसा 'ग्रॉस सैलरी' और 'नेट सैलरी' जैसी टर्म के कंफ्यूजन की वजह से होता है। आइए 'ग्रॉस सैलरी' और 'नेट सैलरी' के गणित को आसान भाषा में समझने का प्रयास करते हैं-

Gross Salary vs Net Salary

ग्रॉस और नेट सैलरी में क्या है अंतर (Photo: iStock)

क्या होती है ग्रॉस सैलरी

ग्रॉस सैलरी वह कुल रकम होती है, जो कंपनी अपने कर्मचारी को टैक्स और अन्य कटौतियों से पहले देने का वादा करती है। इसमें आपकी बेसिक सैलरी, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), कन्वेयंस अलाउंस, मेडिकल अलाउंस और अन्य भत्ते शामिल होते हैं। आसान शब्दों में कहें तो यह वह राशि है जिसमें से कोई भी सरकारी या अनिवार्य कटौती नहीं की गई होती।

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