GDP आंकड़ों पर सवाल उठाने वालों को सरकार की दो टूक, कहा- ग्रोथ बढ़ाने के लिए नहीं बदली गई गणना की पद्धति

मंत्रालय ने उस दावे को भी खारिज किया कि पहली तिमाही 2025-26 के मौजूदा कीमतों वाले GDP अनुमान को 86.05 लाख करोड़ रुपये से घटाकर करीब 80 लाख करोड़ रुपये इसलिए किया गया, ताकि नई GDP वृद्धि दर ज्यादा मजबूत दिखाई दे।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने हाल में जारी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के नए अनुमानों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है। PTI/भाषा के मुताबिक मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि GDP के आंकड़ों में किए गए बदलाव और अलग-अलग मूल्य सूचकांकों में अंतर का कारण आंकड़ों में सुधार और अनुमान लगाने की बेहतर तकनीक है। इसका उद्देश्य देश की आर्थिक वृद्धि दर को कृत्रिम रूप से ज्यादा दिखाना नहीं है। मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण नई GDP सीरीज जारी होने के दो दिन बाद आया है।

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मैन्युफैक्चरिंग में नेगेटिव डिफ्लेटर क्यों आया?

2022-23 को बनाया गया नया आधार वर्ष

सरकार ने हाल ही में 2022-23 को आधार वर्ष बनाकर वार्षिक और तिमाही GDP अनुमानों की नई सीरीज जारी की है। इस नई सीरीज में नए प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI), बैंकिंग सेवाओं के लिए मूल्य सूचकांक और अतिरिक्त प्रशासनिक आंकड़ों को शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि नई सीरीज से अर्थव्यवस्था की स्थिति को पहले की तुलना में ज्यादा बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। संशोधित आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। हालांकि, नई गणना पद्धति के कारण पिछले साल के कुछ आंकड़ों में भी बदलाव हुआ है।

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