केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि सरकार प्रधानमंत्री कुसुम योजना (PM‑KUSUM) का नया संस्करण लाने की तैयारी कर रही है। इस नए मॉडल का उद्देश्य किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर देना है। इस योजना के तहत किसान अपनी जमीन पर खेती करते हुए साथ-साथ सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली भी पैदा कर सकेंगे। यानी एक ही जमीन का इस्तेमाल खेती और बिजली उत्पादन—दोनों के लिए किया जा सकेगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और साफ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा। 🌱⚡
इस नए मॉडल का उद्देश्य किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर देना है।
साल 2019 में लगभग 34,422 करोड़ रुपये के बजट के साथ प्रधानमंत्री कुसुम योजना (PM-KUSUM) शुरू की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
ऊर्जा क्षमता बढ़ाना है उद्देश्य
योजना के तहत सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक करीब 34,800 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ना है। इससे किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप और बिजली की सुविधा मिलेगी, जिससे सिंचाई की लागत कम होगी। साथ ही किसानों को सस्ती और साफ ऊर्जा उपलब्ध होगी, जिससे उनकी आय और खेती दोनों को फायदा होगा।
योजना के तहत अब तक देशभर में 10 लाख से अधिक स्वतंत्र सौर कृषि पंप लगाए जा चुके हैं और 13 लाख से अधिक ग्रिड से जुड़े कृषि पंप को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री जोशी ने एक शिखर सम्मेलन में कहा, "योजना की समयसीमा नजदीक आ रही है। मैंने प्रधानमंत्री से पीएम-कुसुम 2.0 के लिए अनुरोध किया है।" मंत्री ने ’पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दूसरा संस्करण बड़े लक्ष्यों और अधिक परिव्यय के साथ पेश किए जाने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि कई राज्य इस योजना के लिए मंत्रालय से सहयोग मांग रहे हैं। मंत्री ने बताया कि पीएम-कुसुम 2.0 में 10 गीगावाट का विशेष कृषि-सौर ऊर्जा प्रावधान शामिल होगा।" मंत्रालय के अनुसार, इस पहल से किसान खेती के साथ बिजली भी पैदा कर सकेंगे, जो ग्रामीण भारत में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का एक नया मॉडल बनेगा।
(इनपुट-भाषा)
