सरकार ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाते हुए स्टार्टअप इंडिया ’फंड ऑफ फंड्स’ योजना के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी। इस चरण के तहत 10,000 करोड़ रुपये का कोष स्थापित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह कदम शुरुआती चरण के स्टार्टअप और गहन प्रौद्योगिकी (डीप-टेक) अनुसंधान को प्रोत्साहन देगा।
सरकार ने स्टार्टअप इंडिया फंड्स ऑफ फंड के लिए करोड़ों रुपये की किस्त को स्वीकृति दी।(फोटो क्रेडिट-iStock)
आपको बता दें कि अब प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम भी बदल दिया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय अब 'सेवा तीर्थ' के नाम से जाना जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने नए प्रधानमंत्री कार्यालय ’सेवा तीर्थ’ में पहले दिन जिन फाइलों पर हस्ताक्षर किए, उनमें गरीबों, वंचितों, किसानों, युवा शक्ति और नारी शक्ति के सशक्तीकरण से जुड़े निर्णय शामिल हैं। इनमें 10,000 करोड़ रुपये का स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स को मंजूरी भी शामिल है।
फंड ऑफ फंड्स की स्थापना
सरकार ने वर्ष 2016 में स्टार्टअप कंपनियों के प्रोत्साहन के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ ’फंड ऑफ फंड्स’ की स्थापना की थी। इस योजना के पहले चरण के सफल उपयोग के बाद केंद्रीय बजट 2025-26 में 10,000 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त को स्वीकृति दी गई थी। उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के अनुसार अब तक दो लाख से अधिक इकाइयों को स्टार्टअप के रूप में मान्यता दी जा चुकी है, जिन्हें ’स्टार्टअप इंडिया’ कार्ययोजना के तहत प्रोत्साहन मिल सकता है।
यह योजना उद्यम पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है और इसका संचालन भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) करता है। सिडबी बाजार नियामक सेबी में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) को पूंजी उपलब्ध कराता है, जो आगे स्टार्टअप कंपनियों में निवेश करते हैं। इस योजना के तहत समर्थित एआईएफ को ’फंड ऑफ फंड्स’ से मिली राशि से कम-से-कम दोगुना निवेश स्टार्टअप कंपनियों में करना होता है। डीपीआईआईटी इस योजना की निगरानी एजेंसी है, जबकि सिडबी परिचालन एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
(इनपुट- भाषा)
