Gold Prices : इस हफ्ते सोने के दामों में एक तेज गिरावट देखने को मिली है। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतों, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंचे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (प्रतिफल) ने सोने और चांदी पर गहरा दबाव बनाया है। इसके अलावा, फिर से उभरती महंगाई की चिंताओं और अमेरिका में सख्त मौद्रिक नीति जारी रहने की आशंकाओं के कारण भी कीमती धातुओं के भाव नीचे आ गए हैं। इस वजह से न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि भारत में एमसीएक्स (MCX) वायदा और रिटेल (खुदरा) बाजार में भी सोने के दामों में बड़ी कमी दर्ज की गई है।
सोने की कीमतों में भारी गिरावट: जानें भारत से लेकर वैश्विक बाजार तक का हाल
कितना सस्ता हुआ सोना?
सप्ताह के दौरान मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का वायदा भाव करीब 3.50% तक गिर गया। अपने पिछले उच्चतम स्तरों से भारी बिकवाली के चलते सोने की कीमतें तेजी से नीचे आईं। रिटेल बाजारों में सोने के दाम भी काफी घट गए। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, त्योहारी सीजन से पहले सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 24 कैरेट सोने की कीमत 146426 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो 23 अक्टूबर तक घटकर 141630 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। इसका मतलब है एक सप्ताह में 24 कैरेट सोना 4796 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है। इसी तरह, आम ग्राहकों द्वारा आभूषण खरीदने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 22 कैरेट सोने के दामों में भी भारी कमी दर्ज की गई है। 22 कैरेट सोने का भाव 1,34,207 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 23 अक्टूबर को गिरकर 129566 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। यानी इस अवधि में 22 कैरेट सोने के दाम 4641 रुपये प्रति 10 ग्राम तक घट गए हैं। कीमतों में आई इस नरमी से त्योहारी और शादी के सीजन में खरीदारी करने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है।
वैश्विक स्तर पर भी दबाव में रहा बुलियन बाजार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने के दाम काफी दबाव में रहे। शुक्रवार को वैश्विक बाजार में सोना घटकर करीब तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले चार महीनों से भी अधिक समय में सोने की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है। इस बिकवाली के बाद अब बाजार का पूरा ध्यान 4,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर पर टिक गया है। यह स्थिति 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक से ठीक पहले बनी है। इस पूरे हफ्ते में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई, जो जून के बाद से इसका सबसे कमजोर प्रदर्शन है।
क्यों गिर रहे हैं सोने के दाम?
सोने की कीमतों में इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सऊदी अरब में हूती हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई, जिससे ब्रेंट क्रूड 5 महीने से अधिक के उच्च स्तर पर पहुंच गया। महंगे तेल से महंगाई बढ़ सकती है, जिसके कारण केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं। हालांकि व्यापारियों को उम्मीद है कि 27-28 अक्टूबर की बैठक में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा, लेकिन अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा आए उपभोक्ता और उत्पादक महंगाई के आंकड़ों ने इस साल के अंत में दरों में और सख्ती की संभावना को मजबूत कर दिया है। भले ही इस हफ्ते डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में थोड़ी नरमी आई है, लेकिन डॉलर इंडेक्स अभी भी 101.5 के करीब मजबूत स्थिति में है। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान तनाव के समय से अब तक सोने में करीब 20% की गिरावट आ चुकी है।
तकनीकी स्तर और सपोर्ट लेवल्स
कम समय के लिए सोने का तकनीकी आउटलुक कमजोर बना हुआ है और सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सोना 4,000 डॉलर के नीचे लगातार बना रहता है, तो यह गिरावट 3,950 रुपये (लगभग 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम) तक जा सकती है। हालांकि, मध्यम अवधि उम्मीद है कि सोना और चांदी फिर से मजबूती हासिल करेंगे। उनके अनुसार 3,950 डॉलर- 4,000 डॉलर सोने के लिए खरीदारी और सपोर्ट का एक अच्छा दायरा है, जबकि चांदी को 50 डॉलर-55 डॉलर के आसपास सपोर्ट मिल सकता है। उन्होंने आने वाले हफ्तों में 10-15% के बाउंस बैक (सुधार) की संभावना जताई है, लेकिन तेजी का रुझान दोबारा शुरू होने के लिए सोने को $4,200 के ऊपर टिकना होगा।
दिवाली और त्योहारों पर क्या पड़ेगा असर?
कीमतों में आई इस गिरावट के बावजूद त्योहारी सीजन और दिवाली के दौरान आभूषणों की मांग मजबूत रहने की पूरी उम्मीद है। भारतीय उपभोक्ता हमेशा से सोने को एक सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश मानते आए हैं। ऐसे में गिरावट को एक अच्छे मौके के रूप में देखा जा रहा है। इस बार त्योहारों पर ग्राहक केवल डिजाइन ही नहीं, बल्कि सोने की शुद्धता, प्रामाणिकता और पारदर्शिता को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके साथ ही बाजार में हल्के वजन की ज्वेलरी और पुराने सोने को बदलकर नया सोना खरीदने (Old-gold exchange) के कार्यक्रमों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
