अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी का किला मध्यावधि चुनाव में ढहने के बाद शेयर बाजार से लेकर सोने और चांदी तक में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। पिछले दो दिनों में सोना करीब 3,048 रुपये और चांदी 7,652 रुपये महंगी हुई है। यानी सोने और चांदी की कीमतों में क्रमशः 2.17% और 4.26% की बढ़ोतरी हुई है। धनतेरस और दिवाली के शुभ मुहूर्त पर सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए यह अच्छी खबर नहीं है।
हालांकि, कमोडिटी एक्सपर्ट और केडिया एडवाइजरी के एमडी अजय केडिया का कहना है कि अब कीमतें सस्ती होने का इंतजार करना सही नहीं होगा। आने वाले दिनों में सोने और चांदी में तेजी जारी रह सकती है। उन्होंने अगली दिवाली तक सोने का टारगेट बढ़ाकर 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है। इसके पीछे वैश्विक हालात में बदलाव और ऐतिहासिक रुझानों का हवाला दिया जा रहा है। आइए समझते हैं कि आखिर अब सोने और चांदी में तेजी क्यों लौट सकती है?
सोने में गिरावट के बाद लौटी बड़ी तेजी
सोने की कीमतों में इस साल बड़ी गिरावट आई है। जनवरी 2026 में 5,598 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छूने वाला अंतरराष्ट्रीय सोना गिरकर करीब 3,937 डॉलर पर आ गया है। यानी रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 30% की गिरावट आई है। भारतीय वायदा बाजार MCX पर भी सोना अपने रिकॉर्ड हाई ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम से फिसलकर ₹1,39,433 पर आ गया है। यहां भी करीब 23% की गिरावट दर्ज की गई है।
सोने में बड़ी गिरावट के बाद हमेशा लौटी है तेजी
वहीं, इतिहास पर नजर डालें तो सोने की कीमतों में तेज गिरावट के बाद बड़ी तेजी आने के उदाहरण मिलते हैं। कई बार बाजार में अचानक आई गिरावट आगे चलकर लंबी अवधि की तेजी की शुरुआत साबित हुई है। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट, 2022 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी और 2026 के ईरान-तेल संकट के दौरान भी सोने की कीमतों में पहले बड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि, 2008 और 2022 की बड़ी गिरावट के बाद सोने की कीमतों में क्रमशः 170% और 245% से ज्यादा तक की तेजी देखी गई। यही उम्मीद अब 2026 की गिरावट के बाद लगाई जा रही है।
दिवाली तक सोना-चांदी का भाव क्या होगा?
सेबी सर्टिफाइड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, दिवाली तक सोना और चांदी और महंगे हो सकते हैं। उनके अनुमान के मुताबिक, दिवाली तक सोने का भाव 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 2 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंच सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई घटने की उम्मीद है। इससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव कम होगा, जो सोने और चांदी की कीमतों को मजबूती दे सकता है।
युद्ध के दौरान क्यों गिरा सोना?
आमतौर पर युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के समय निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानकर खरीदारी करते हैं, जिससे इसकी कीमतों में तेजी आती है। लेकिन 2026 में ईरान संघर्ष के दौरान बाजार में इसका उलट देखने को मिला और सोने की कीमतों में गिरावट आई। इसकी बड़ी वजह युद्ध का महंगाई और ब्याज दरों पर पड़ने वाला असर था। ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई।
इसके अलावा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, सितंबर में फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें बढ़ाने और दिसंबर में फिर बढ़ोतरी की आशंका ने भी सोने पर दबाव बनाया। मजबूत डॉलर के कारण दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो गया, जिससे इसकी मांग प्रभावित हुई। वहीं, बाजार में अस्थिरता बढ़ने पर कई निवेशकों ने नकदी जुटाने के लिए सोना बेच दिया। इन सभी वजहों से सुरक्षित निवेश की मांग के बावजूद सोने में बिकवाली देखने को मिली।
शुभ मुहूर्त पर सोने-चांदी की खरीदारी
सोने-चांदी में अब क्यों लौटेगी तेजी?
जनवरी 2026 के रिकॉर्ड हाई से सोने में करीब 30% की गिरावट आई है। इसके बावजूद केंद्रीय बैंक और गोल्ड ETF खरीदारी कर रहे हैं। दुनिया के केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार बने हुए हैं। गोल्ड ETF में 211 टन की खरीदारी हुई। रिपोर्ट के अनुसार, तीसरी तिमाही में कीमतें गिरने के बावजूद केंद्रीय बैंकों ने 321 टन सोना खरीदा।
वहीं, ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मध्यावधि चुनाव में झटका लगने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। कच्चा तेल टूटकर 94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इससे दुनियाभर में महंगाई कम होने की उम्मीद है और केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव कम हो सकता है। इसके अलावा, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड भी नीचे आई है। ये सभी कारक सोने और चांदी की कीमतों को मजबूती दे सकते हैं।

