जब भी 'महंगाई' शब्द का जिक्र होता है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले रसोई का बजट, महंगी होती दालें और पेट्रोल-डीजल की कीमतें आती हैं। लेकिन इस बार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट दी है, जिसने सबको चौंका दिया है। आरबीआई के मुताबिक, फिलहाल आपकी थाली से ज्यादा आपकी तिजोरी यानी सोना और चांदी महंगाई बढ़ाने के जिम्मेदार हैं। फरवरी 2026 की मौद्रिक नीति बैठक में यह साफ किया गया कि भले ही खाने-पीने की चीजों के दाम काबू में दिख रहे हों, लेकिन कीमती धातुओं की चमक महंगाई के आंकड़ों को ऊपर ले जा रही है।
थाली में राहत
आम आदमी के लिए सबसे सुखद खबर यह है कि 'फूड इंफ्लेशन' (खाद्य महंगाई) फिलहाल आरबीआई की सबसे बड़ी चिंता नहीं है। इसके पीछे कई सकारात्मक कारण हैं। पहली बात तो यह कि इस साल खरीफ की फसल उम्मीद से बेहतर रही है और रबी फसलों की बुवाई भी काफी अच्छी हुई है। साथ ही, सरकार के पास अनाज का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले महीनों में चावल, गेहूं और दालों की कीमतों में किसी बड़े उछाल की आशंका कम है। हालांकि, टमाटर और प्याज जैसी सब्जियों के दाम कभी-कभी अचानक बढ़ जाते हैं, लेकिन आरबीआई इसे फिलहाल एक बड़ा जोखिम नहीं मान रहा है। यानी आपकी रसोई का बजट फिलहाल सुरक्षित हाथों में है।
सोना-चांदी क्यों बने महंगाई की वजह?
अब सवाल यह उठता है कि अगर खाना सस्ता है, तो महंगाई बढ़ क्यों रही है? आरबीआई ने इसके लिए 'कोर महंगाई' (Core Inflation) का हवाला दिया। असल में, अगर हम महंगाई के आंकड़ों से सोने और चांदी को बाहर निकाल दें, तो दिसंबर में कोर महंगाई मात्र 2.6 प्रतिशत थी, जो एक बेहद सुरक्षित स्तर माना जाता है। लेकिन जैसे ही इसमें कीमती धातुओं को जोड़ा जाता है, आंकड़े बिगड़ने लगते हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं, युद्ध के हालातों और आर्थिक सुस्ती के डर से दुनिया भर के निवेशक अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए सोना-चांदी खरीद रहे हैं। इस भारी मांग ने इनकी कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है, जिसका असर भारत के 'कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स' (CPI) पर पड़ रहा है।
अस्थिरता बनी बड़ी चुनौती
आरबीआई गवर्नर ने इस बात पर भी जोर दिया कि सोना और चांदी के दाम सिर्फ ऊंचे ही नहीं हैं, बल्कि उनमें बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव (Volatility) भी देखने को मिल रहा है। कभी कीमतें अचानक आसमान छू लेती हैं, तो कभी तेजी से गिर जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चल रही इस उठापटक के कारण भारत जैसे देश के लिए महंगाई का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। निवेशक सुरक्षित निवेश के चक्कर में लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिससे घरेलू बाजार में भी कीमतें स्थिर नहीं हो पा रही हैं।
आम आदमी पर इसका क्या असर होगा?
इस पूरे विश्लेषण का सीधा मतलब यह है कि इस वक्त महंगाई की आग आपकी रसोई में नहीं, बल्कि ज्वेलरी काउंटर पर लगी है। जो लोग शादी-ब्याह के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए जेब ढीली करना भारी पड़ सकता है। आरबीआई का मानना है कि कुल मिलाकर महंगाई नियंत्रण में रहेगी, लेकिन सोना-चांदी जैसी 'चमकती धातुएं' आने वाले समय में आर्थिक नीतियों के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकती हैं।
