भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश भर में लोकप्रिय शराब ब्रांडों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। FSSAI ने मशहूर 'ओल्ड मोंक' (Old Monk) के तीन वेरिएंट्स समेत कई जाने-माने व्हिस्की और रम ब्रांड्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। जांच में पाया गया कि ये कंपनियां उत्पाद को प्राकृतिक रूप से पुराना करने के बजाय उसमें कृत्रिम स्वाद (Artificial Flavours) मिला रही थीं, जो सुरक्षा और गुणवत्ता के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
ओल्ड मोंक और मैकडॉनल्स नंबर 1 समेत कई प्रमुख शराब ब्रांड्स पर FSSAI का बड़ा एक्शन, देखें पूरी लिस्ट
किन-किन ब्रांड्स पर गाज गिरी?
FSSAI द्वारा जारी लिस्ट में देश की कई बड़ी और लोकप्रिय शराब इकाइयां शामिल हैं।
- ओल्ड मोंक (Old Monk): इसके तीन प्रमुख वेरिएंट्स द लीजेंड (The Legend), गोल्ड रिजर्व और ट्रिपल एक्स मैच्योर्ड रम (XXX Matured Rum) पर रोक लगाई गई है। इनका निर्माण 'मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर' की खोपोली यूनिट में होता है।
- मैकडॉनल्स नंबर 1 (McDowell's No 1): बारामती स्थित यूनाइटेड स्पिरिट्स की इकाई में बनने वाली मैकडॉनल्स नंबर 1 रम पर प्रतिबंध लगाया गया है।
- बैगपाइपर और ओल्ड कास्क: मध्य प्रदेश में इनब्रू बेवरेजेस (INBREW Beverages) द्वारा निर्मित 'बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की' और 'ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम' पर बैन लगा है।
- मैकडॉनल्स सेलिब्रेशन रम और सेंट्रल प्रोविंस: मध्य प्रदेश में एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज द्वारा बनाई जाने वाली 'सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की' और 'मैकडॉनल्स सेलिब्रेशन रम' भी इस लिस्ट में हैं।
- एंटीक्विटी ब्लू और रॉयल चैलेंज: यूनाइटेड स्पिरिट्स की मध्य प्रदेश इकाई में बनने वाली 'एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की' और 'रॉयल चैलेंज व्हिस्की' पर भी रोक लगा दी गई है।
इसके अलावा, गोवा की 'मंडेक्सी डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज' में भी निरीक्षण किया गया है और महाराष्ट्र के छह अन्य निर्माताओं को अलग से नोटिस भेजे गए हैं।
दावों में झोल: '7 साल पुरानी' के नाम पर छलावा
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक FSSAI ने विशेष रूप से ओल्ड मोंक के लेबलिंग दावों पर सवाल उठाए हैं। कंपनी अपनी 'XXX रम' को "7 साल पुरानी ब्लेंडेड" बताकर बेचती है। हालांकि, जांच में सामने आया कि इस उत्पाद में मुख्य रूप से न्यूट्रल और बिना मैच्योर की हुई स्पिरिट का इस्तेमाल होता है, जबकि मैच्योर्ड रम स्पिरिट की मात्रा 5% से भी कम होती है। नियम के अनुसार अगर प्रोडक्ट पर उम्र का दावा किया जाता है, तो वह उसमें मिलाई गई सबसे कम उम्र की स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए।
कृत्रिम फ्लेवर से ग्राहकों को गुमराह करने का आरोप
FSSAI ने 2 अगस्त को एक प्रेस रिलीज जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। प्राधिकरण ने कहा कि ऐसा कोई अंतरराष्ट्रीय मानक नहीं है जहां रम में अलग से 'रम का फ्लेवर' या व्हिस्की में 'व्हिस्की का फ्लेवर' मिलाया जाए। लैब टेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कंपनियां प्रोडक्ट की प्राकृतिक महक और स्वाद की नकल करने के लिए ऊपर से कृत्रिम फ्लेवर मिला रही हैं और इसे स्टैंडर्ड प्रोडक्ट बताकर बेच रही हैं। FSSAI का कहना है कि रम में कॉफी या वैनिला का फ्लेवर मिलाना स्वीकार्य है, लेकिन रम में ही रम का कृत्रिम फ्लेवर मिलाना चाय में चाय का फ्लेवर मिलाने जैसा है, जो ग्राहकों को गुमराह करता है। ऐसे उत्पादों को "फ्लेवर्ड/प्रीमिक्स रम" कहा जाना चाहिए।
मामला पहुंचा बॉम्बे हाईकोर्ट
इस बीच, डियाजियो इंडिया (Diageo India) ने FSSAI के आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कंपनी का तर्क है कि उसकी लेबलिंग प्रक्रिया में कोई कानूनी रुकावट नहीं है और उसका तरीका उद्योग के स्थापित मानकों के बिल्कुल अनुकूल है।
