आजकल Mutual Fund में निवेश करने वाले कई लोग अपने Portfolio में लगातार नए-नए फंड जोड़ते रहते हैं। कभी किसी फंड के अच्छे Returns देखकर निवेश किया जाता है, तो कभी किसी दोस्त, सोशल मीडिया या Finfluencer की सलाह पर नया Fund खरीद लिया जाता है। धीरे-धीरे Portfolio में कई योजनाएं जमा हो जाती हैं। लेकिन FundsIndia के Group CEO Akshay Sapru के मुताबिक, सिर्फ ज्यादा Mutual Funds रखने का मतलब यह नहीं है कि आपका Portfolio अच्छी तरह Diversified है। असली Diversification इस बात पर निर्भर करता है कि आपका पैसा अलग-अलग तरह के निवेश, जोखिम और Investment Styles में कितना फैला हुआ है।
निवेश से पहले समझें Diversification का असली मतलब
अक्सर लोग कर देते हैं ये गलती
दरअसल, कई बार निवेशक 8-10 Mutual Funds तक खरीद लेते हैं, लेकिन उन सभी Funds के Portfolio में एक जैसी कंपनियां या एक ही सेक्टर के शेयर शामिल होते हैं। ऐसे में नाम भले ही अलग-अलग हों, लेकिन आपका पैसा असल में उन्हीं कंपनियों या सेक्टरों पर ज्यादा निर्भर हो सकता है। इसका मतलब है कि ज्यादा Funds रखने के बावजूद Risk उतना Diversify नहीं होता, जितना निवेशक समझ रहा होता है। इसलिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि आपके पास कितने Funds हैं, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि हर Fund आपके Portfolio में क्या अलग चीज जोड़ रहा है।
निवेशकों की एक बड़ी गलती यह भी होती है कि वे हाल में अच्छा Return देने वाले Fund या Asset Class के पीछे भागने लगते हैं। जब किसी Fund, Sector या Asset Class का प्रदर्शन अच्छा रहता है और उसके बारे में लगातार चर्चा होती है, तो निवेशकों को लगता है कि आगे भी वही सबसे अच्छा प्रदर्शन करेगा। इसी वजह से कई लोग बिना अपनी जरूरत और Risk Profile देखे उस Fund में पैसा लगाना शुरू कर देते हैं। Expert के मुताबिक, Social Media और लगातार मिलने वाली Market Information इस तरह के फैसलों को और बढ़ा सकती है।
ऐसे में निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि पैसा किस लक्ष्य के लिए लगाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति को तीन साल बाद पैसे की जरूरत है, तो केवल इसलिए बहुत ज्यादा Risk वाले Small-Cap या Thematic Fund में निवेश करना सही नहीं माना जा सकता क्योंकि उस समय उनका Return अच्छा रहा है। Investment का चुनाव आपके Financial Goal, समय अवधि और Risk लेने की क्षमता के हिसाब से होना चाहिए।
सही Portfolio बनाते समय इन बातों पर ध्यान दें:
सिर्फ Funds की संख्या न देखें: ज्यादा योजनाएं होने का मतलब अपने आप बेहतर Diversification नहीं है।
Portfolio में Overlap देखें: अलग-अलग Funds में अगर वही कंपनियां बार-बार मौजूद हैं तो Risk एक ही जगह ज्यादा हो सकता है।
हर Fund का उद्देश्य तय करें: Portfolio में शामिल हर Fund की एक स्पष्ट भूमिका होनी चाहिए।
Asset Classes में Diversification रखें: जरूरत के अनुसार Equity, Debt, Gold जैसे अलग-अलग Asset Classes को समझें।
Financial Goals को ध्यान में रखें: Short-Term और Long-Term Goals के लिए निवेश का तरीका अलग हो सकता है।
Returns के पीछे लगातार न भागें: पिछले प्रदर्शन को देखकर बार-बार Fund बदलना जरूरी नहीं है।
Risk Profile समझें: निवेश वही होना चाहिए जिसे आप अपनी Risk Capacity के हिसाब से संभाल सकें।
आज के समय में SIP के जरिए लंबे समय तक निवेश करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है और कई निवेशक पहले की तुलना में Market और Mutual Funds के बारे में ज्यादा जानकारी भी रखते हैं। लेकिन जानकारी होने और उसे सही तरीके से इस्तेमाल करने में फर्क है। किसी Fund की Category या पिछले साल का Return समझ लेना पर्याप्त नहीं है। यह देखना ज्यादा जरूरी है कि वह निवेश आपके पूरे Portfolio और आपके Financial Goal के साथ कैसे फिट बैठता है।
इसलिए Mutual Fund निवेशकों के लिए सबसे अहम सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि “कौन सा Fund सबसे ज्यादा Return दे रहा है?” बल्कि यह भी होना चाहिए कि “मेरे Portfolio में इस Fund की जरूरत क्यों है?” एक मजबूत Portfolio का मकसद ज्यादा से ज्यादा Funds जमा करना नहीं, बल्कि अलग-अलग निवेशों को इस तरह रखना है कि हर निवेश की अपनी भूमिका हो और कुल Portfolio आपके लक्ष्य और Risk के हिसाब से बना हो।
