Foreign Companies Packup From China, India New Destination:करीब एक महीने पहले जिस अमेरिकी कंपनी के प्रोडक्ट को चीन ने अपने यहां बैन कर दिया था। अब वहीं कंपनी भारत में करीब 2.7 अरब डॉलर का निवेश करने जा रही है। जिसके जरिए करीब 5000 नौकरियां पैदा होंगी। मोदी सरकार ने अमेरिका की चिप कंपनी माइक्रोन को देश में सेमीकंडक्टर परीक्षण और पैकेजिंग इकाई स्थापित करने की परियोजना को मंजूरी दे दी है। माइक्रोन अमेरिका की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी है। चीन ने जैसा माइक्रोन के साथ किया है, उसकी तरह कई ऐसी कंपनियां हैं जो राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नए रवैये का सामना कर रही है। इसकी वजह से माइक्रोन जैसी कंपनियां चीन से अपना बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी कर रही है। जिसका बड़ा फायदा भारत को मिल सकता है।
चीन को विदेशी कंपनियां देंगी झटका
भारत में क्या करेगी माइक्रोन
माइक्रोन कंप्यूटर मेमोरी उत्पाद, फ्लैश ड्राइव जैसे संवेदनशीनल प्रोडक्ट बनाती है। जो कि भारत में एक ओएसएटी (आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट) संयंत्र स्थापित करेगी। जो उत्पाद को उपयोग के लायक तैयार करने के लिए परीक्षण और पैकेजिंग करेगी।पहले चरण में सरकार ने चार ओएसएटी परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें टाटा समूह का सहस्रा सेमीकंडक्टर्स के प्रस्ताव भी शामिल है।
कई कंपनियां बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी में
न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार यूरोपियन यूनियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट जेंस ने कहा है कि चीन में बिजनेस का माहौल अपने सबसे निचले स्तर पर है। चैंबर के एक सर्वे के अनुसार 570 कंपनियों ने कहा है कि चीन में बिजनेस करना बहुत मुश्किल हो गया है। हर पांच में से तीन कंपनियों का कहना है कि वहां पर माहौल राजनीतिक ज्यादा हो गया है।
चीन की सरकार विदेशी कंपनियों को शक के नजर से देख रही है। कई सारी कार्रवाई भी की गई है। Bain & Co और Capvision पर पुलिस रेड भी की गई। इसके अलावा मिंट्ज ग्रुप के साथ भी जो कार्रवाई की गई उसकी कोई जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके अलावा चीन में लोकल कंपनियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिससे कई कंपनियां चीन से कारोबार समेटने की तैयारी में हैं।
