छोटी चूक पर अब नहीं होगी जेल या जुर्माना, सरकार ने शुरू की 'सुधार नोटिस' व्यवस्था

विभाग ने सोमवार को बयान में कहा कि यह बदलाव सरकार के ’ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार करने में सुगमता) लक्ष्य के तहत जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से किया गया है।

देश में व्यापार को बढ़ावा देने और कारोबारियों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने विधिक मापविज्ञान अधिनियम (Legal Metrology Act) के तहत एक नई 'सुधार नोटिस' (Improvement Notice) व्यवस्था लागू की है। इस नए नियम के तहत अगर कोई कारोबारी पहली बार नियमों का उल्लंघन करता है, तो सरकार सीधे उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई या जुर्माना नहीं लगाएगी, बल्कि उसे अपनी कमियों को सुधारने का एक मौका दिया जाएगा। सोमवार को जारी एक सरकारी बयान में बताया गया कि यह बदलाव सरकार के 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार करने में सुगमता) के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 'जन विश्वास अधिनियम, 2026' के माध्यम से किया गया है।

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क्या है सुधार नोटिस और यह कैसे काम करेगा?

नई व्यवस्था के मुताबिक, यदि कोई कानूनी नाप-तौल या कानूनी अधिकारी पहली बार किसी दुकान, फैक्ट्री या कंपनी में कोई प्रक्रियागत या कागजी कमी पाता है, तो वह सीधे जुर्माना ठोकने के बजाय संबंधित कारोबारी को एक 'सुधार नोटिस' जारी करेगा। इस नोटिस में साफ-साफ लिखा होगा कि कारोबारी ने कहाँ गलती की है और उसे ठीक करने के लिए एक उचित समय-सीमा (Time Limit) भी दी जाएगी। अगर कारोबारी दिए गए समय के अंदर अपनी उस गलती या कमी को सुधार लेता है, तो मामला वहीं खत्म हो जाएगा और उसके खिलाफ कोई कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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