FII Outflow: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FII) की चाल ने फिर बड़ा संकेत दिया है। एक तरफ मार्च तिमाही में HDFC Bank और ICICI Bank में करीब ₹45,000 करोड़ की बिकवाली ने बैंकिंग शेयरों पर दबाव बनाया, तो दूसरी तरफ अप्रैल में छह सत्रों में करीब ₹8,000 करोड़ की खरीदारी ने राहत की सांस दी।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बैंकों पर भारी
HDFC और ICICI पर सबसे ज्यादा चोट
मार्च तिमाही में FIIs ने वित्तीय शेयरों से करीब ₹60,000 करोड़ निकाले, जिसमें अकेले HDFC Bank और ICICI Bank की हिस्सेदारी करीब 75 प्रतिशत रही। HDFC Bank में लगभग ₹35,000 करोड़ और ICICI Bank में करीब ₹10,000 करोड़ की बिकवाली हुई। इससे HDFC Bank में FII होल्डिंग घटकर 44 प्रतिशत और ICICI Bank में करीब 34.48 प्रतिशत रह गई।
गिरावट की वजह सिर्फ बिकवाली नहीं थी
इन दोनों शेयरों पर दबाव सिर्फ विदेशी बिकवाली का नहीं था। HDFC Bank में यह कमजोरी चेयरमैन के इस्तीफे और नैतिकता से जुड़े विवाद के बाद और गहरी हो गई। साथ ही भू-राजनीतिक तनाव, ट्रेड वॉर, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और RBI की फॉरेक्स मार्केट कार्रवाइयों ने भी बैंकिंग शेयरों की धार कमजोर की। मार्च में बैंक के नेट ओपन पोजिशन पर नए नियमों ने भी दबाव बढ़ाया।
बावजूद इसके, बैंक की बुनियाद मजबूत दिखी
शेयरों में कमजोरी के बावजूद बैंकिंग सेक्टर की मूल तस्वीर उतनी खराब नहीं रही। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों बैंकों की कमाई स्थिर रही, एसेट क्वालिटी बेहतर बनी रही, क्रेडिट ग्रोथ जारी रही और बैलेंस शीट भी मजबूत दिखी। यही वजह है कि बाजार के कई जानकार इसे शॉर्ट टर्म दबाव मान रहे हैं, न कि लंबे संकट का संकेत।
अप्रैल में बदला माहौल, FIIs ने फिर खरीदी शुरू की
सबसे बड़ा मोड़ अप्रैल में आया, जब 10 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच FIIs ने छह में से सात सत्रों में नेट बायिंग की और भारतीय इक्विटी में करीब ₹8,000 करोड़ लगाए। इसमें लगभग ₹6,500 करोड़ सेकेंडरी मार्केट और ₹1,500 करोड़ प्राइमरी मार्केट में गए। यह संकेत है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट रहा है।
बाजार को क्या संकेत मिल रहा है
अप्रैल की खरीदारी के साथ सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लगभग 9.2 प्रतिशत चढ़े हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी जोरदार रिकवरी दिखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई नकारात्मक कारक पहले ही कीमतों में शामिल हो चुके हैं और अब निवेशक वैल्यूएशन, कमाई और चुनिंदा सेक्टरों पर फोकस कर रहे हैं। बैंकिंग, ऑटो, FMCG और मेटल्स में खरीदारी का रुझान दिख रहा है।
डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
