FII DII Holding In Indian Market : भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की ताकत का समीकरण तेजी से बदल रहा है। पहली बार घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की हिस्सेदारी निफ्टी 500 कंपनियों में रिकॉर्ड 21% पर पहुंच गई है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की हिस्सेदारी गिरकर 17% के अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। यह बदलाव दिखाता है कि भारतीय बाजार अब पहले की तुलना में विदेशी निवेश पर कम और घरेलू पूंजी पर ज्यादा निर्भर होता जा रहा है।
भारती बाजार के होल्डिंंग पैटर्न में बड़ा बदलाव
मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 तक DII ने लगातार नौवीं तिमाही अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। दूसरी ओर, FII की हिस्सेदारी लगातार दबाव में रही। बीते 22 महीनों में DII ने भारतीय शेयर बाजार में 166 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश किया, जबकि इसी दौरान FII ने 58 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी की।
SIP का पैसा बना सबसे बड़ा सहारा
रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। हर महीने औसतन करीब 3 अरब डॉलर का SIP निवेश बाजार में आ रहा है। यही नियमित निवेश विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद बाजार को मजबूत आधार दे रहा है। साल 2026 की दूसरी तिमाही में DII ने भारतीय शेयरों में 22.8 अरब डॉलर का निवेश किया, जबकि FII ने 13.2 अरब डॉलर की शुद्ध बिकवाली की। हालांकि जून के दूसरे पखवाड़े में FII की ओर से 1.3 अरब डॉलर की खरीदारी हुई, लेकिन महीने के पहले हिस्से में हुई 4.3 अरब डॉलर की बिकवाली की भरपाई नहीं हो सकी।
प्रमोटर और रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी कितनी?
जून 2026 तक निफ्टी 500 कंपनियों में प्रमोटरों की हिस्सेदारी बढ़कर 49.5% हो गई। वहीं, रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी 12.6% रही। इससे साफ है कि बाजार में सबसे बड़ा बदलाव संस्थागत निवेशकों के स्तर पर देखने को मिला है।
किन सेक्टरों में की खरीदारी?
DII ने 24 में से 19 सेक्टरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। सबसे ज्यादा खरीदारी प्राइवेट बैंक, टेलीकॉम, रियल एस्टेट, IT, हेल्थकेयर, इंश्योरेंस, ऑटोमोबाइल, PSU बैंक,
NBFC, रिटेल और कैपिटल गुड्स सेक्टर में देखने को मिली है। वहीं, FII ने भी 24 में से 19 सेक्टरों में हिस्सेदारी घटाई। सबसे ज्यादा बिकवाली प्राइवेट बैंक, टेक्नोलॉजी, रियल एस्टेट, ऑटो, हेल्थकेयर, कंज्यूमर, ऑयल एंड गैस, सीमेंट और यूटिलिटी सेक्टर में देखने को मिली।
हर जगह बढ़ा DII का दबदबा
रिपोर्ट के मुताबिक DII की हिस्सेदारी लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप तीनों श्रेणियों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। निजी कंपनियों में DII की हिस्सेदारी 21.8% और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में 17.3% हो गई। इसके विपरीत, निजी कंपनियों में FII की हिस्सेदारी घटकर 19.4% और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में 9.7% रह गई।
