Fake Currency Notes : नोटबंदी (डीमोनिटाइजेशन) के बाद देश में नकली करेंसी नोटों के मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही, भारत अब सिक्योरिटी दस्तावेजों के उत्पादन में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन चुका है और विदेश से किसी भी तरह के सुरक्षा दस्तावेज का आयात नहीं किया जा रहा है। सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SPMCIL) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) विजय रंजन सिंह ने गुरुवार को यह अहम जानकारी दी।
नोटबंदी के बाद नकली नोटों के मामले जबरदस्त कमी आई
नकली नोटों में आई बड़ी गिरावट
एएनआई के मुताबिक SPMCIL के 21वें पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान मीडिया से बात करते हुए विजय रंजन सिंह ने बताया कि उनकी संस्था ही नकली नोटों की पहचान करने और उनके जाली होने का प्रमाण पत्र जारी करने के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद से SPMCIL के पास जांच के लिए आने वाले जाली नोटों की संख्या में काफी कमी आई है। हालांकि, उनके पास इस गिरावट का कोई सटीक आंकड़ा मौजूद नहीं था, लेकिन उन्होंने नासिक सेंटर के हवाले से बताया कि जाली नोटों के मामलों में बहुत ही बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखा गया है।
'मेक इन इंडिया' से सिक्योरिटी प्रिंटिंग में मिली आत्मनिर्भरता
विजय रंजन सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब भारत को सुरक्षा से जुड़े दस्तावेजों के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, "हम अब पूरी तरह से आत्मनिर्भर हैं। हम बाहर से कोई भी सिक्योरिटी डॉक्यूमेंट आयात नहीं कर रहे हैं। सब कुछ भारत में ही तैयार किया जा रहा है।" उन्होंने बताया कि SPMCIL ने अपने बैंक नोट प्रिंटिंग की क्षमताओं को पूरी तरह से आधुनिक बना लिया है और अब देश के पास दुनिया की बेहतरीन नोट प्रिंटिंग सुविधाएं मौजूद हैं। 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत बैंक नोट में इस्तेमाल होने वाले कागज का उत्पादन भी देश के भीतर बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
SPMCIL का नया विस्तार और वित्तीय सफलता
वर्तमान में SPMCIL की देशभर में नौ उत्पादन इकाइयां (यूनिट्स) काम कर रही हैं। इनमें चार टंकणशालाएं (मिंट्स), दो करेंसी प्रेस, दो सिक्योरिटी प्रेस और एक पेपर मिल शामिल हैं, जहां सिक्के, बैंक नोट, पासपोर्ट और अन्य सुरक्षा दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। निगम अपनी क्षमता को और बढ़ाते हुए नर्मदापुर में एक और बैंक नोट पेपर प्रोडक्शन यूनिट स्थापित करने की योजना बना रहा है। सरकार के निरंतर नीतिगत सहयोग की सराहना करते हुए सीएमडी ने कहा कि सरकारी नीतियों की मदद से संस्था बहुत अच्छा मुनाफा कमा रही है। उन्होंने SPMCIL को कॉरपोरेटाइजेशन (निगमीकरण) का एक सबसे सफल उदाहरण बताया।
देश के आर्थिक विकास में SPMCIL की अहम भूमिका
इस कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से देश के विकास में SPMCIL के योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि यह निगम बैंक नोटों के संचालन, सिक्कों की ढलाई, ई-पासपोर्ट, स्मारक सिक्के और स्टाम्प पेपर के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मंत्री ने इसे देश के वित्तीय और प्रशासनिक ढांचे का एक मजबूत स्तंभ बताया।
इसी कार्यक्रम में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की अपर सचिव (अतिरिक्त सचिव) अनु पी मथाई ने भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह वार्षिक पुरस्कार समारोह उन कर्मचारियों और अधिकारियों की मेहनत, ईमानदारी और नवाचार (इनोवेशन) को सम्मानित करने का अवसर है जो देश की आर्थिक प्रणाली को मजबूत बनाने में दिन-रात योगदान दे रहे हैं।
