टाइम्स नाउ नवभारत एक्सप्लेनर: भारत में जल्द ही प्लास्टिक (Plastic Currency) से बने नोट देखने को मिल सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने 5 जून 2026 को बताया कि पॉलिमर (Polymer Notes) यानी विशेष प्रकार के प्लास्टिक से बने नोट जारी करने का प्रस्ताव फिलहाल आरबीआई के विचाराधीन है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि इस बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और यह योजना शुरुआती चरण में है। खबर है कि मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई इस प्रस्ताव के सभी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है। बैंक यह जानने की कोशिश कर रहा है कि पॉलिमर नोटों को लागू करना कितना फायदेमंद और व्यावहारिक होगा।
क्या बोले आरबीआई गवर्नर?
संजय मल्होत्रा ने कहा कि मीडिया में चल रही खबरों में कुछ हद तक सच्चाई जरूर है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि आरबीआई पॉलिमर नोटों के फायदे और नुकसान दोनों का मूल्यांकन कर रहा है। गवर्नर के अनुसार अगर भविष्य में इस संबंध में कोई फैसला लिया जाता है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से दी जाएगी। फिलहाल केंद्रीय बैंक इस बात का अध्ययन कर रहा है कि क्या भारत जैसे विशाल देश में पॉलिमर नोटों को सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है।
आखिर क्या होते हैं पॉलिमर नोट?
पॉलिमर नोट ऐसे करेंसी नोट होते हैं जो कागज की बजाय विशेष प्रकार के प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। दुनिया के कई देशों में इनका इस्तेमाल पहले से हो रहा है। ये नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत और टिकाऊ माने जाते हैं। पॉलिमर सामग्री के कारण ये नोट जल्दी फटते नहीं हैं और लंबे समय तक उपयोग में रह सकते हैं। इसके अलावा ये पानी, नमी और गंदगी से भी काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं। यही वजह है कि कई देशों ने पारंपरिक कागजी नोटों की जगह पॉलिमर नोटों को अपनाया है।
पॉलिमर नोटों के क्या हैं फायदे?
एक्सपर्ट्स के अनुसार पॉलिमर नोटों के कई महत्वपूर्ण फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा इनकी लंबी उम्र है। कागजी नोट कुछ वर्षों में खराब हो जाते हैं, जबकि पॉलिमर नोट अधिक समय तक चलते हैं। इससे नए नोट छापने की जरूरत कम पड़ती है और लंबे समय में लागत भी घट सकती है। दूसरा बड़ा फायदा सुरक्षा से जुड़ा है। पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर आसानी से जोड़े जा सकते हैं। इनमें पारदर्शी विंडो, विशेष डिजाइन और उन्नत सुरक्षा चिह्न शामिल किए जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना काफी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा ये नोट पानी में भी खराब नहीं होते। बारिश, नमी या गलती से धुल जाने पर भी इनके खराब होने की संभावना कम रहती है। आम लोगों के लिए भी यह एक बड़ी सुविधा साबित हो सकती है।
पॉलिमर नोटों को लेकर चर्चा तेज
क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि पॉलिमर नोटों के कई फायदे हैं, लेकिन इनके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे पहली चुनौती इनकी उत्पादन लागत है। शुरुआत में पॉलिमर नोट छापने की लागत कागजी नोटों की तुलना में अधिक हो सकती है। इसके लिए नई तकनीक और विशेष मशीनों की जरुरत पड़ सकती है। दूसरी चुनौती देशभर में मौजूद एटीएम और नकदी गिनने वाली मशीनों को नए नोटों के अनुरूप बनाना है। अगर पॉलिमर नोट जारी किए जाते हैं तो बैंकिंग सिस्टम में कई तकनीकी बदलाव करने पड़ सकते हैं। इसके अलावा पर्यावरणीय प्रभाव और पुराने नोटों के निपटान जैसे मुद्दों पर भी विचार करना होगा। यही कारण है कि आरबीआई जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहता और सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन कर रहा है।
पहले भी हो चुकी है कोशिश
भारत में पॉलिमर नोटों को लेकर यह पहली चर्चा नहीं है। इससे पहले वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी थी कि 10 रुपये के पॉलिमर नोटों का परीक्षण किया जाएगा। उस समय करीब एक अरब पॉलिमर नोट जारी करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए देश के 5 शहरों का चयन किया गया था। इनमें कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर शामिल थे। सरकार का उद्देश्य यह जांचना था कि भारतीय परिस्थितियों में पॉलिमर नोट कितने प्रभावी साबित होते हैं। हालांकि बाद में तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका और योजना रोक दी गई।
दुनिया के कई देशों में हो रहा इस्तेमाल
पॉलिमर नोट कोई नई तकनीक नहीं है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे कई देशों में इनका सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया को पॉलिमर नोटों का अग्रणी देश माना जाता है। वहां कई वर्षों से प्लास्टिक मुद्रा का इस्तेमाल हो रहा है। इन देशों का अनुभव बताता है कि पॉलिमर नोटों की उम्र सामान्य नोटों की तुलना में अधिक होती है और नकली नोटों की समस्या पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। यही कारण है कि भारत भी अब इस विकल्प पर दोबारा विचार कर रहा है।
क्या जल्द बदल जाएंगे भारतीय नोट?
फिलहाल ऐसा नहीं कहा जा सकता कि भारतीय बाजार में जल्द ही प्लास्टिक नोट आ जाएंगे। आरबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती स्तर पर है और इस पर विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। केंद्रीय बैंक पहले इसके आर्थिक, तकनीकी और परिचालन प्रभावों का मूल्यांकन करेगा। इसके बाद ही किसी तरह का अंतिम फैसला लिया जाएगा। इसलिए फिलहाल लोगों को अपने मौजूदा कागजी नोटों का उपयोग सामान्य रूप से जारी रखना चाहिए।
नकदी की कमी को लेकर भी दिया भरोसा
इस बीच आरबीआई ने देश में कैश की उपलब्धता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। हाल के दिनों में कुछ इलाकों में एटीएम में कैश की कमी की खबरें सामने आई थीं। इस पर गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वित्तीय प्रणाली में पर्याप्त मात्रा में कैश उपलब्ध है। आरबीआई के पास बैंकों और एटीएम को कैश उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर कहीं नकदी की कमी होती है तो उसे जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। केंद्रीय बैंक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कैश की आपूर्ति भी करेगा।
भारत में पॉलिमर नोटों की वापसी को लेकर चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है। आरबीआई इस विकल्प के फायदे और चुनौतियों का अध्ययन कर रहा है। अगर भविष्य में यह योजना लागू होती है तो भारतीय मुद्रा प्रणाली में यह एक बड़ा बदलाव होगा। हालांकि फिलहाल यह केवल विचार के स्तर पर है और अंतिम फैसला आने में अभी समय लग सकता है। ऐसे में देशवासियों को आरबीआई के आधिकारिक निर्णय का इंतजार करना होगा।
