दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) फिर पूरी तरह खुलने को तैयार है। ईरान ने दावा किया है कि नए होर्मुज रूट को लेकर ओमान के साथ सहमति बन गई है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि इस सप्ताह ईरान के साथ समझौता हो सकता है। इस खबर के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अमेरिका, ईरान और ओमान किन हितों के साथ इस अंतरिम समझौते के करीब पहुंचे हैं और इससे दुनिया पर क्या असर पड़ सकता है? आइए समझते हैं कि होर्मुज को लेकर तीनों देशों का गेम प्लान क्या है और आने वाले दिनों में इसका वैश्विक तेल मार्केट पर क्या असर होगा?
होर्मुज डील में किन मुद्दों पर हो रही है बातचीत?
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत दो बड़े सवालों पर केंद्रित है। पहला, इस अहम समुद्री मार्ग पर किसका नियंत्रण होगा। दूसरा, क्या ईरान को यहां से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों से किसी तरह का शुल्क लेने की अनुमति दी जानी चाहिए। ईरान, ओमान और अमेरिका के बीच इन्हीं मुद्दों पर राजनीतिक और तकनीकी स्तर पर चर्चा जारी है।
ईरान क्या चाहता है?
ईरान का कहना है कि ओमान के साथ बातचीत का मकसद जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार करना है, ताकि दोनों देशों के संप्रभु अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा का सम्मान बना रहे। ईरान चाहता है कि होर्मुज का प्रबंधन वह और ओमान मिलकर करें तथा जहाजों की आवाजाही पर उनका नियंत्रण रहे। अभी जलमार्ग खोलने के तरीके, समुद्री सेवा शुल्क और सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बातचीत जारी है। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह नेविगेशन सहायता, पायलट सेवा और पर्यावरण संरक्षण जैसी सेवाओं के लिए शुल्क लेने की योजना बना सकता है।
अमेरिका और ओमान का प्रस्ताव क्या है?
अमेरिका चाहता है कि व्यावसायिक जहाज बिना किसी ईरानी टोल या मंजूरी के होर्मुज से गुजर सकें। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह बातचीत ईरान के परमाणु कार्यक्रम से अलग है। प्रस्ताव के तहत खाड़ी में आने वाले जहाज ईरान की ओर वाली शिपिंग लेन और बाहर जाने वाले जहाज ओमान की ओर वाली लेन का इस्तेमाल कर सकते हैं। बातचीत में समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, संभावित सर्विस फीस और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी हटाने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। ओमान ने मलक्का जलडमरूमध्य की तर्ज पर एक मॉडल भी सुझाया है, जहां जहाज स्वेच्छा से समुद्री सेवाओं के लिए आर्थिक योगदान देते हैं।
सबसे बड़ा विवाद क्या है?
मौजूदा बातचीत 17 जून को हुए ईरान-अमेरिका के समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधारित मानी जा रही है। उस समझौते में ईरान ने 60 दिनों तक बिना शुल्क के व्यावसायिक जहाजों को होर्मुज से गुजरने देने पर सहमति जताई थी। लेकिन यह साफ नहीं था कि लंबे समय में जलडमरूमध्य का नियंत्रण किसके पास रहेगा और जहाज किस रास्ते से गुजरेंगे। अब बातचीत का मुख्य मुद्दा यही है कि भविष्य में जलमार्ग का प्रबंधन कौन करेगा और क्या ईरान को समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क लेने की अनुमति मिलेगी। यदि ऐसा होता है तो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण कई शिपिंग कंपनियों को ईरानी अधिकारियों के साथ काम करने में दिक्कत आ सकती है।
होर्मुज को लेकर समझते हैं तीनों देशों का गेम प्लान
ईरान का गेम प्लान: ईरान के लिए होर्मुज सिर्फ एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि अमेरिका के खिलाफ उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है। अमेरिकी हमले का जवाब ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया है। इससे दुनिया में तेल की कीमत में बड़ा उछाल आया और अमेरिका को बातचीत के मेज पर आना हुआ। ऐसे में ओमान की मध्यस्थता में ईरान, अमेरिका से एक सम्मानजनक समझौता चाहता है, जिससे वह अपनी रणनीतिक स्थिति बनाए रखते हुए आर्थिक रूप से मजबूत बन सके।
ट्रंप प्रशासन का गेम प्लान: होर्मुज डील के जरिये अमेरिका चाहता है कि तेल की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे और वैश्विक बाजार स्थिर रहे। वहीं, अमेरिका की दीर्घकालिक रणनीतिक प्राथमिकता अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और चीन पर केंद्रित है। ऐसे में वाशिंगटन नहीं चाहता कि उसकी सैन्य और कूटनीतिक ऊर्जा लंबे समय तक खाड़ी संकट में उलझी रहे। इसलिए संभावित होर्मुज समझौता अमेरिका के लिए आर्थिक, रणनीतिक और भू-राजनीतिक तीनों मोर्चों पर लाभकारी साबित हो सकता है।
ओमान का गेम प्लान: अगर होर्मुज डील हो जाती है तो इसमें सबसे अहम भूमिका ओमान की होगी। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) का सदस्य होने के बावजूद ओमान ने दशकों से संतुलित और तटस्थ विदेश नीति अपनाई है। यही वजह है कि अमेरिका और ईरान जैसे कट्टर प्रतिद्वंद्वी भी उस पर भरोसा करते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य का दक्षिणी हिस्सा ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप से जुड़ा है, जिससे उसकी भौगोलिक भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। हालिया वार्ताओं में ओमान ने ईरान के साथ नए शिपिंग रूट की रूपरेखा और समुद्री मार्ग के भौगोलिक निर्देशांक तय करने में अहम भूमिका निभाई।
ओमान के लिए यह केवल कूटनीतिक सफलता नहीं, बल्कि आर्थिक अवसर भी है। यदि होर्मुज में स्थिरता लौटती है तो उसके बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और समुद्री व्यापार को बड़ा फायदा मिल सकता है। साथ ही, मध्य-पूर्व में एक भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में उसकी वैश्विक साख और मजबूत होगी। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम में ओमान को कई विश्लेषक 'किंगमेकर' या 'तेल के खेल का चौधरी' मान रहे हैं।
होर्मुज को लेकर अमेरिका-ईरान और ओमान एक मंच पर
क्या इस समझौते से मिडिल ईस्ट का संकट खत्म होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज समझौता होने से समुद्री व्यापार से जुड़ा तत्काल तनाव जरूर कम हो सकता है, लेकिन इससे ईरान और अमेरिका के सभी मतभेद खत्म नहीं होंगे। इसके बाद दोनों देशों को व्यापक समझौता ज्ञापन और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फिर से बातचीत करनी होगी। वहीं, इजराइल-हिज्बुल्लाह संघर्ष, ईरान समर्थित समूहों के हमले, लाल सागर में हौथियों की गतिविधियां और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य विवाद अभी भी बने रहेंगे। इसलिए होर्मुज डील को केवल एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है, न कि पूरे मध्य पूर्व संकट का समाधान।
