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Explained: क्या है शैडो फ्लीट, जिसके दम पर अमेरिकी प्रतिबंधों को होर्मुज में ठेंगा दिखा रहा ईरान?

अमेरिका द्वारा होर्मुज की नाकेबंदी के बाद भी ‘शैडो फ्लीट’ अपना काम आसानी से कर रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका के कड़े प्रतिबंध के बावजूद ईरान इन जहाजों के सहारे अपना तेल दुनिया में पहुंचा रहा है।

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शैडो फ्लीट
Authored by: Alok Kumar
Updated May 6, 2026, 14:03 IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान-अमेरिका के बीच 'पीस डील' जल्द होने और प्रोजेक्ट फ्रीडम' रोकने का ऐलान किया है। इस खबर के बाद मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद बढ़ गई है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप ने जिन उद्देश्यों को हासिल करने के लिए ईरान पर हमला किया था उसे पा लिया है? जवाब है नहीं! फिर ट्रंप ऐसा क्यों कर रहे हैं? इसका सीधा जवाब है कि अमेरिकी द्वारा अहम समुद्री व्यापारिक मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के बावजूद, ट्रंप- ईरान को घुटने पर नहीं ला पाएं हैं।

ट्रंप की कोशिश थी कि होर्मुज की घेराबंदी कर वो ईरान को आर्थिक रूप से बर्बाद कर देंगे। इसके बाद ईरान समझौता करने पर राजी हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ! ईरान आज भी डटकर खड़ा है। आखिर ईरान कैसे अपनी जरूरत पूरा कर रहा है तो शैडो फ्लीट वह ताकत है जो ईरान को बल दे रहा है। ट्रंप चाहकर भी शैडो फ्लीट को रोक नहीं पा रहे हैं और जिसके जरिये ईरान तेल बेचने से लेकर अपनी जरूरत का सामान ला रहा है। आइए समझते हैं कि क्या है शैडो फ्लीट, जिसके दम पर प्रतिबंधों को ठेंगा दिखा रहा है ईरान?

शैडो फ्लीट्स क्या हैं?

शैडो फ्लीट एक व्यापक शब्द है जिसका इस्तेमाल उन जहाजों के लिए किया जाता है जो प्रतिबंधित सामान को समुद्र के रास्ते एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए गलत शिपिंग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि वे पकड़े न जाएं। ईरान, वेनेज़ुएला और रूस जैसे देशों से तेल और पेट्रोलियम जैसे उत्पादों के परिवहन के लिए ऐसे जहाज बहुत अहम रहे हैं। इन देशों को पिछले कुछ सालों में पश्चिमी देशों के अलग-अलग तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। इसके बचने के लिए इन शैडो फ्लीट्स का इस्तेमाल किया गया।

शैडो फ्लीट के जहाज इस तरह से काम करते हैं कि उन्हें ट्रैक करना, उनका पता लगाना और उन पर कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है। उनकी धोखेबाज़ी वाली हरकतों में ऐसे अस्पष्ट कारोबारी ढांचे बनाना शामिल है, जिनसे जहाज की मालिकाना हक और माल के मूल स्थान का पता नहीं चल पाता।

47 सालों के US प्रतिबंधों की तोड़ है शैडो फ्लीट

अब सवाल उठता है कि क्या ये शैडो फ्लीट अभी तैयार हो गए हैं तो नहीं? दरअसल, ये जहाज अमेरिका के 47 सालों से लगाए गए प्रतिबंधों का परिणाम है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वाशिंगटन ने तेहरान पर प्रतिबंध लगा दिए थे। इस क्रांति के दौरान अमेरिका-समर्थक शासक शाह मोहम्मद रजा पहलवी को सत्ता से हटा दिया गया था। 1980 के बाद से इन दोनों देशों के बीच कोई भी कूटनीतिक संबंध नहीं रहा है। उसके बाद से ही ये शैडो फ्लीट अमेरिकी प्रतिबंधों से बचकर ट्रेड करने में इस्तेमाल हो रहे हैं। इस बार भी होर्मुज की अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद ये 'छाया बेड़ा' (shadow fleet) एक समानांतर समुद्री व्यवस्था के तहत बिना किसी रुकावट के अपना काम कर रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद सैंकड़ों शैडो फ्लीट कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद से लेकर गैस ढो रहे थे। जहाजों के असली मालिकों की पहचान छिपाने के लिए, यह 'शैडो फ्लीट' "नकली झंडों" और 'शेल कंपनियों' के एक जटिल जाल पर निर्भर हैं। इन जहाजों को संभालने वाला ऑपरेशनल नेटवर्क पूरी दुनिया में फैला हुआ है। जहाज चलाने वाली कंपनियां मुख्य रूप से ईरान (15.7 प्रतिशत), चीन (13 प्रतिशत), ग्रीस (11 प्रतिशत से ज्यादा) और संयुक्त अरब अमीरात (9.7 प्रतिशत) की हैं।

3,000 से ज्यादा जहाज शैडो फ्लीट में शामिल

अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक, शैडो फ्लीट में 3,000 से ज्यादा जहाज शामिल हैं। ऐसे जहाज अक्सर 15 से 20 साल पुराने होते हैं, जिसका मतलब है कि वे मुश्किल से ही समुद्र में चलने लायक होते हैं और वे घटिया दर्जे के बीमा और सर्टिफिकेशन के साथ काम करते हैं। ये जहाज अक्सर तेल या दूसरी चीजों को एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर करने में शामिल होते हैं। इस तरह के ट्रांसफर अपने आप में गैर-कानूनी नहीं होते। इनके पीछे लॉजिस्टिकल वजहें हो सकती हैं।

लेकिन शैडो फ्लीट टैंकरों के मामले में, एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर अक्सर खुले समुद्र में, बंदरगाह की निगरानी से दूर किए जाते हैं। इसमें अक्सर बैन किए गए कच्चे तेल को बिना बैन वाले तेल के साथ मिलाना, या तेल के असली स्रोत को छिपाने के लिए एक के बाद एक कई बार जहाजों के बीच ट्रांसफर करना शामिल होता है।

Strait of Hormuz

Strait of Hormuz

पकड़े जाने से कैसे बचते हैं?

शैडो फ्लीट के टैंकर अक्सर ज्यादा जोखिम वाले कामों, जैसे कि बैन किए गए बंदरगाहों में घुसने या गैर-कानूनी तरीके से एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर करने के दौरान, अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) को बंद कर देते हैं या उसमें छेड़छाड़ करते हैं।

AIS जहाज की पहचान, उसकी जगह, उसके रास्ते और दूसरी जानकारी भेजता है, जिससे दूसरे जहाजों और अधिकारियों को जहाज की हरकतों पर रियल टाइम में नज़र रखने में मदद मिलती है। AIS ट्रांसपोंडर को बंद कर देने या उनके साथ छेड़छाड़ करने से जहाज की सही जगह का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

कभी-कभी, शैडो फ्लीट के जहाज ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम को भी "स्पूफ" करते हैं। इसका मतलब है कि वे गलत लोकेशन डेटा भेजते हैं, जिससे ऐसा लगता है कि वे अपनी असली जगह से सैकड़ों मील दूर हैं। ये जहाज अक्सर अपने नाम, रजिस्ट्रेशन का देश और मैनेजिंग कंपनी का नाम बदलते रहते हैं। कुछ तो धोखाधड़ी वाले झंडों के नीचे भी काम करते हैं।

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