कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने सात लाख से अधिक निष्क्रिय खातों में फंसी रकम को लौटाने की तैयारी शुरू कर दी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इन खातों में कुल 30.52 करोड़ रुपये जमा हैं, जिन्हें जल्द ही संबंधित खाताधारकों या उनके कानूनी वारिसों को वापस किया जाएगा। यह फैसला श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में लिया गया।
ईपीएफओ का फैसला, सात लाख निष्क्रिय पीएफ खातों के पैसे जल्द भेजे जाएंगे (तस्वीर-istock)
1000 रुपये तक वाले खातों को प्राथमिकता
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक समीक्षा में 7.11 लाख ऐसे निष्क्रिय खातों की पहचान की गई है, जिनमें 1,000 रुपये या उससे कम राशि बची हुई है। मंत्रालय ने तय किया है कि इन छोटे खातों का निपटान पहले किया जाएगा, ताकि लोगों को उनकी जमा राशि जल्दी मिल सके। अधिकारियों का मानना है कि छोटी रकम होने के कारण कई खाताधारक दावा नहीं कर पाते, जिससे पैसा लंबे समय तक फंसा रहता है। अब इस प्रक्रिया को आसान बनाकर सीधे भुगतान किया जाएगा।
कब माना जाता है खाता निष्क्रिय
ईपीएफओ के नियमों के अनुसार अगर किसी खाते में लगातार 36 महीने तक कर्मचारी या नियोक्ता की ओर से कोई अंशदान जमा नहीं होता है, तो उसे निष्क्रिय खाता माना जाता है। नौकरी बदलने, काम छोड़ने या जानकारी अपडेट न होने की वजह से कई खाते इस कैटेगरी में चले जाते हैं। ऐसे खातों में जमा राशि पर ब्याज मिलना भी रुक सकता है, जिससे खाताधारकों को नुकसान होता है।
कुल 31.86 लाख निष्क्रिय खातों में 10,903 करोड़ रुपये
सूत्रों के मुताबिक, ईपीएफओ के पास कुल 31.86 लाख निष्क्रिय खाते हैं, जिनमें करीब 10,903 करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें से सिर्फ 1,000 रुपये तक के बैलेंस वाले सात लाख खातों में 30.52 करोड़ रुपये की राशि है। मंत्रालय ने साफ किया है कि फिलहाल छोटे खातों का निपटान प्राथमिकता से किया जाएगा, जबकि बाकी खातों का समाधान चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
आधार से जुड़े खातों में सीधे ट्रांसफर
जिन खातों को आधार से जोड़ा गया है, उनमें पीएफ की रकम सीधे संबंधित बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। अगर खाताधारक की मृत्यु हो चुकी है, तो यह राशि नामित व्यक्ति या वैध उत्तराधिकारी को दी जाएगी। इसके लिए जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद भुगतान किया जाएगा। इस कदम से लंबित दावों की संख्या घटने की उम्मीद है।
ईपीएफओ 3.0 से सेवाएं होंगी तेज
इस बीच, ईपीएफओ अपनी डिजिटल पहल ‘ईपीएफओ 3.0’ पर भी काम कर रहा है। इसके तहत कोर बैंकिंग प्रणाली आधारित सुविधाएं लागू की जा रही हैं। उद्देश्य यह है कि पीएफ दावों के निपटान की समयसीमा को मौजूदा 20 दिनों से घटाकर तीन दिन से भी कम किया जाए। साथ ही, सदस्यों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकार का मानना है कि इन कदमों से पारदर्शिता बढ़ेगी, दावों का निपटान तेज होगा और कर्मचारियों को उनकी मेहनत की कमाई समय पर मिल सकेगी। निष्क्रिय खातों के निपटान की यह प्रक्रिया आने वाले समय में और भी तेज की जाएगी।
