रिटायरमेंट (Retirement) के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रहने के लिए समय रहते बचत और निवेश शुरू करना जरूरी है। नौकरी करने वाले लोगों के सामने रिटायरमेंट फंड (Retirement Fund) तैयार करने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसे विकल्प मौजूद हैं। लेकिन अगर कोई व्यक्ति हर महीने 10,000 निवेश करता है, तो 30 साल बाद किस योजना में ज्यादा पैसा जमा हो सकता है? इसका जवाब ब्याज दर, निवेश पर मिलने वाले रिटर्न और जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करता है। आइए समझते हैं पूरी कैलकुलेशन-
हर महीने 10,000 निवेश के 30 साल: EPF Vs NPS कहां बनेगा ज्यादा फंड (Photo: iStock)
EPF में 10,000 महीने निवेश करने पर कितना बनेगा फंड?
EPF मुख्य रूप से नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट बचत का विकल्प है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता योगदान करते हैं तथा जमा राशि पर सरकार द्वारा घोषित ब्याज मिलता है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF की ब्याज दर 8.25% है। अगर कैलकुलेशन के लिए यह मान लिया जाए कि अगले 30 वर्षों तक हर महीने 10,000 रुपये जमा किए जाते हैं और पूरी अवधि में 8.25% सालाना रिटर्न मिलता है, तो निवेश की कुल राशि करीब 36 लाख होगी। इस पर चक्रवृद्धि ब्याज से लगभग 1.57 करोड़ का फंड बन सकता है। हालांकि, यह केवल अनुमान है। अगले 30 वर्षों तक ब्याज दर एक जैसी रहने की गारंटी नहीं है।
NPS में निवेश से कितना पैसा मिल सकता है?
NPS में निवेश का पैसा शेयर बाजार, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियों जैसे अलग-अलग एसेट में लगाया जाता है। इसका रिटर्न बाजार के प्रदर्शन और निवेश के विकल्पों पर निर्भर करता है। इसलिए इसमें EPF की तरह निश्चित ब्याज दर नहीं मिलती।
अगर NPS में 30 साल तक हर महीने 10,000 रुपये निवेश करने पर सालाना 10% रिटर्न मिलने की कल्पना करें, तो कुल फंड करीब 2.26 करोड़ हो सकता है। वहीं, 9% सालाना रिटर्न के अनुमान पर यह राशि लगभग 1.83 करोड़ तक पहुंच सकती है।
रिटायरमेंट पर पैसे निकालने के नियम भी समझें
EPF में निर्धारित शर्तों के तहत कुछ विशेष जरूरतों के लिए आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है। दूसरी ओर, NPS में सामान्य निकासी नियमों के तहत रिटायरमेंट पर जमा कॉर्पस का अधिकतम 60% एकमुश्त निकाला जा सकता है। आम तौर पर कम से कम 40% राशि से एन्युटी खरीदनी होती है, जिससे नियमित पेंशन मिलती है। अगर जमा की गई कुल राशि 5 लाख रुपये या उससे कम है, तो लागू नियमों के तहत पूरी राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है।
आपके लिए कौन-सा विकल्प बेहतर है?
अगर आपकी प्राथमिकता घोषित ब्याज दर के आधार पर रिटायरमेंट बचत करना है, तो EPF अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। वहीं, लंबी अवधि में बाजार से जुड़े निवेश के जरिए अधिक रिटर्न की संभावना तलाशने वाले निवेशक NPS पर विचार कर सकते हैं। सही विकल्प चुनने से पहले जोखिम, टैक्स लाभ, निकासी नियम और रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की जरूरत का आकलन जरूर करें।
