EPF Interest Rules: कर्मचारियों की बचत और रिटायरमेंट सुरक्षा के लिए Employee Provident Fund (EPF) एक महत्वपूर्ण योजना है। यह योजना Employees Provident Fund Organisation (EPFO) द्वारा संचालित की जाती है। EPF अकाउंट में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान जमा होता है और इस राशि पर हर साल ब्याज भी मिलता है। हालांकि, बहुत से लोगों के मन में एक सवाल होता है कि नौकरी छोड़ने के बाद अकाउंट में कितने समय तक ब्याज मिलता है। अगर आपके मन में यह सवाल है तो इस आर्टिकल में आपको इसी सवाल का जवाब देने जा रहे हैं-
inoperative EPF account क्या होता है (Photo: iStock)
अकाउंट इन-ऑपरेटिव कब होता है
सबसे पहले तो यही समझें कि किसी कर्मचारी का अकाउंट इन-ऑपरेटिव कब होता है। EPFO के नियमों के अनुसार, 55 वर्ष की आयु के व्यक्ति का ईपीएफ अकाउंट तीन साल यानी 36 महीने में इनऑपरेटिव हो जाता है। वहीं, कोई व्यक्ति रिटायर हो रहा है तो उसकी रिटायरमेंट डेट से 3 साल के बाद अकाउंट इन-ऑपरेटिव हो जाता है। अकाउंट इन-ऑपरेटिव होने का मतलब है कि इस तरह के अकाउंट में ब्याज मिलना बंद हो जाता है।
55 साल की उम्र से पहले रिटायर होने पर नियम
अब सवाल यह कि अगर कोई कर्मचारी 55 साल की उम्र से पहले रिटायर होता है तो उस स्थिति में क्या नियम लागू होंगे। ईपीएफओ की मानें तो इस स्थिति में भी ब्याज व्यक्ति के 58 वर्ष की आयु के होने तक मिलता रहेगा। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति 50 वर्ष की आयु में रिटायर हो जाता है तो उसके अकाउंट में 8 वर्षों तक ब्याज मिलता रहेगा। 58 वर्ष की आयु होने पर यह अकाउंट इन-ऑपरेटिव हो जाएगा।
55 साल की उम्र या उसके बाद रिटायर होने पर नियम
अगर कोई कर्मचारी 55 साल या उससे अधिक उम्र में रिटायर होता है तो उसके EPF अकाउंट पर रिटायरमेंट की तारीख से तीन साल तक ब्याज मिलता है। नियमों के अनुसार, 55 साल की उम्र में रिटायर होने पर व्यक्ति को उसके 58 साल के हो जाने तक अकाउंट में ब्याज मिलता रहेगा। इसी तरह, उदाहरण से समझें तो अगर व्यक्ति 60 वर्ष की आयु में रिटायर होता है तो भी उसे अगले तीन साल तक ब्याज मिलेगा। यानी इस स्थिति में कर्मचारी को 63 वर्ष की आयु प्राप्त होने तक ब्याज मिलता रहेगा। इसके बाद यह अकाउंट इन-ऑपरेटिव हो जाएगा।
