EMI हो सकती है कम! RBI कर सकता है रेपो रेट में 0.25% की कटौती

देश में महंगाई लगातार नीचे आने और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती दिखने के बीच, आरबीआई की दिसंबर मौद्रिक नीति बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत से भी कम रहने के कारण केंद्रीय बैंक 0.25% तक रेपो रेट घटा सकता है। हालांकि मजबूत GDP ग्रोथ के चलते कुछ अर्थशास्त्री दरों को यथावत रखने की संभावना भी जता रहे हैं।

मुद्रास्फीति का दबाव कम होने के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपनी आगामी मौद्रिक नीति बैठक में प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.25 प्रतिशत कम कर सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर 8.2 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के मद्देनजर केंद्रीय बैंक ब्याज दर को स्थिर रख सकता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति पिछले दो महीनों से सरकार के तय दायरे की निचली सीमा (दो प्रतिशत) से भी कम है।

RBI

क्या EMI होगी कम?

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अर्थव्यवस्था में आई तेजी के कारण आरबीआई ब्याज दरों को यथावत रख सकता है। यह तेजी राजकोषीय समेकन, लक्षित सार्वजनिक निवेश और जीएसटी दर कटौती जैसे विभिन्न सुधारों से समर्थित है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 3-5 दिसंबर 2025 तक होनी है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा पांच दिसंबर को समिति के फैसलों की घोषित करेंगे। केंद्रीय बैंक ने पिछले साल फरवरी में दरों में कमी शुरू की थी और कुल एक प्रतिशत की कटौती करके रेपो दर को 5.5 प्रतिशत कर दिया था। अगस्त में कटौती रोक दी गई थी।

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