कम EMI का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं होता; जानिए कैसे बैंक आपको फंसाते हैं झांसे में?

अगर आप भी लोन लेने का प्लान कर रहे है तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। बैंक लोन देते समय कई तरह की बातें करते हैं ऐसे में आपको लोन अप्प्रूव होने से पहले उन बातों को समझ लेना चाहिए।

आज के समय में घर खरीदना हो, कार लेनी हो या बच्चों की पढ़ाई करानी हो, लोन लेना एक आम बात हो गई है। बैंक और फाइनेंशियल कंपनियां भी ग्राहकों को लुभाने के लिए आए दिन नए-नए ऑफर्स लाती रहती हैं। जब भी हम लोन लेने किसी बैंक या वित्तीय संस्थान में जाते हैं, तो उनका सबसे पहला और बड़ा फोकस इस बात पर होता है कि आपकी मासिक किस्त यानी ईएमआई (EMI) कितनी कम रखी जाए। वे आपको बड़े-बड़े विज्ञापनों में दिखाते हैं कि "सिर्फ इतनी कम EMI पर पाएं शानदार लोन"।

Pre Approved Loan  (6)

एक आम आदमी के लिए कम ईएमआई का ऑफर बेहद आकर्षक होता है, क्योंकि उसे लगता है कि हर महीने उसकी जेब पर कम बोझ पड़ेगा और वह आसानी से अपना खर्च चला लेगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो लोन कम ईएमआई वाला दिख रहा है, क्या वह वाकई में सस्ता है? वित्तीय मामलों के जानकार और एक्सपर्ट्स हमेशा आगाह करते हैं कि कम ईएमआई का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं होता है। इसके पीछे बैंकों का एक बड़ा गणित और सोची-समझी रणनीति होती है, जिसे समझे बिना अगर आपने लोन ले लिया, तो आप अनजाने में ही बहुत बड़ा नुकसान कर बैठते हैं।

End of Feed