Duty Free Sugar Import: देश में चीनी की कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। रिकॉर्ड ऊंची कीमतों और आने वाले त्योहारी सीजन में बढ़ने वाली मांग के बीच केंद्र सरकार ने करीब 10 साल बाद एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। सरकार ने 31 अक्टूबर, 2026 तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दे दी है।
ड्यूटी फ्री होगा चीनी का आयात
क्यों सरकार को बदलना पड़ा फैसला?
हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसी नौबत क्या आई कि सरकार को 10 साल पुरानी नीति बदलनी पड़ी? इसकी सबसे बड़ी वजह है घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमत और सप्लाई का दबाव। पिछले दो महीनों में घरेलू चीनी कीमतों में करीब 40 फीसदी तक उछाल आया है। अब सरकार को डर है कि अगर त्योहारी सीजन में मांग और बढ़ी तो कीमतों पर दबाव और तेज हो सकता है।
क्यों बढ़ गई चीनी की कीमत?
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण सप्लाई का कमजोर होना है। सप्लाई की कमी के पीछे उत्पादन में कमी और इथेनॉल ब्लेंडिंग में गन्ने का इस्तेमाल बड़ी वजह है। इसके अलावा अगस्त से नवंबर के बीच देश में त्योहारों का सीजन रहता है। इसे देखते हुए बड़े उपभोक्ताओं, डीलर्स और स्टॉकिस्ट ने चीनी का स्टॉक बढ़ाना शुरू कर दिया। इन सभी वजहों के चलते चीनी के दाम में बड़ा उछाल आया है।
10 साल बाद क्यों बदलना पड़ा फैसला?
भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों के साथ-साथ सबसे बड़े उपभोक्ता देशों में शामिल है। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में घरेलू उत्पादन से ही देश की जरूरत पूरी करने की कोशिश की जाती है। पिछले कई सालों में सरकार की नीति का फोकस भी घरेलू उद्योग को सपोर्ट करने और जरूरत के हिसाब से निर्यात को बढ़ावा देने पर रहा है। लेकिन इस समय समीकरण बदल गया है। घरेलू बाजार में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं और सरकार के लिए उपभोक्ताओं को महंगी चीनी से राहत देना प्राथमिकता बन गया है। इसीलिए करीब एक दशक बाद सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को ड्यूटी फ्री करने का फैसला लिया है।
10 लाख टन चीनी आएगी कैसे?
सरकार ने कच्ची चीनी के आयात को टैरिफ रेट कोटा व्यवस्था के तहत ड्यूटी फ्री किया है। पोर्ट आधारित रिफाइनरियां इस कोटे के लिए आवेदन कर सकती हैं। ये रिफाइनरियां आमतौर पर विदेश से कच्ची चीनी लाकर उसे रिफाइन करती हैं और तैयार चीनी का निर्यात करती हैं। अब सरकार ने पहले से आयात की गई कच्ची चीनी से तैयार रिफाइंड चीनी को भी अक्टूबर के अंत तक घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी है। इससे घरेलू बाजार में अतिरिक्त सप्लाई अपेक्षाकृत जल्दी बढ़ सकती है।
कल रॉकेट बने शुगर स्टॉक्स आज धड़ाम क्यों हुए?
21 अगस्त की शुरुआती ट्रेडिंग में Dalmia Bharat Sugar 5.47 फीसदी तक टूटकर 480.30 रुपये, Dwarikesh Sugar Industries 4.32 फीसदी गिरकर 52.99 रुपये और Balrampur Chini Mills 4.15 फीसदी नीचे 735.25 रुपये तक आ गया। Triveni Engineering & Industries में भी करीब 3.82 फीसदी की गिरावट दिखी। दूसरे चीनी शेयरों में भी 1-3 फीसदी तक दबाव देखने को मिला। यानी एक दिन पहले तक जो Sugar Stocks रॉकेट बने हुए थे, सरकार के एक फैसले ने अगले ही दिन उनकी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। इसके पीछे की वजह साफ है कि सरकार चीनी के दाम नहीं बढ़ने देना चाहती है।
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