How To Build A Diverse Portfolio: इंवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में जोखिम को मैनेज करने के लिए डायवर्सिफिकेशन सबसे प्रभावी टूल में से एक है। डायवर्सिफिकेशन का मतलब है कि अपनी पूंजी को थोड़ा-थोड़ा अलग-अलग एसेट क्लास यानी निवेश ऑप्शनों में निवेश करें। जैसे कि सारा पैसा स्टॉक्स में न डालें, बल्कि थोड़ा म्यूचुअल फंड, गोल्ड और इसी तरह के दूसरे विकल्पों में लगाए। एक्सपर्ट्स इस बात पर जोर देते हैं कि विभिन्न एसेट क्लास में निवेश फैलाने से संभावित नुकसान को कम करते हुए रिटर्न बढ़ाया जा सकता है। कैसे? आइए जानते हैं।
बहुत जरूरी है Diversification
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अलग-अलग एसेट क्लास के बीच विपरीत संबंध
हर एसेट क्लास (इक्विटी, फिक्स्ड इनकम ऑप्शन और सोना) अलग-अलग जोखिम-रिटर्न प्रोफाइल रखते हैं और आर्थिक स्थितियों पर अलग-अलग रेस्पॉन्स देते हैं। एसेट क्लास के बीच यह विपरीत संबंध रिस्क मैनेजमेंट में मदद करता है और ओवरऑल पोर्टफोलियो प्रदर्शन में सुधार करता है।
एक गिरेगा तो दूसरे चढ़ेगा
कुछ एसेट क्लास ऐसी होती हैं, जो एक दूसरे के उलट चलती हैं। जैसे कि शेयर बाजार गिरता है तो आम तौर पर सोना महंगा होता है। क्योंकि लोग गिरते स्टॉक मार्केट से पैसा निकालकर सेफ जगह के लिए सोने में निवेश बढ़ाते हैं। वहीं शेयर बाजार में तेजी पर सोने से इस तरफ आते हैं।
यदि आपका पैसा अलग-अलग जगह लगा होगा तो एक एसेट के गिरने पर दूसरी एसेट आपको फायदा देगी। इससे ओवरऑल रिस्क कंट्रोल में रहेगा।
कैसे बांटें अपना पैसा
एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि अपने पैसे को सिर्फ विभिन्न एसेट क्लास के बीच न बांटें। बल्कि एसेट क्लास के साथ-साथ भौगोलिक क्षेत्रों, सिक्योरिटीज और समय के आधार पर अपनी पूंजी को फैलाएं। निवेश का एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवंटित करने से रिस्क-एडजस्टमेंट रिटर्न में वृद्धि हो सकती है। निवेशक अपनी लॉन्ग टर्म स्ट्रेटेजी पर कायम रहते हुए भी अलग-अलग ऑप्शनों में निवेश कर सकते हैं।
