सरकार का बड़ा फैसला, डीजल और ATF के निर्यात पर बढ़ाई ड्यूटी; 21.5 प्रति लीटर की जगह देंगे पड़ेंगे 55.5 रुपये

पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव जारी है। इसी वैश्विक अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए डीजल पर निर्यात ड्यूटी को दोगुना से भी अधिक बढ़ा दिया है।

पश्चिम एशिया संकट के चलते दुनियाभर के तेल बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस बीच, केंद्र सरकार ने डीजल पर निर्यात ड्यूटी को दोगुना से ज्यादा बढ़ा दिया। वैश्विक बाजार में आई इस आग को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में भारी इजाफा कर दिया है। अब डीजल के निर्यात पर शुल्क को 21.5 रुपये से बढ़ाकर सीधे 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, एटीएफ पर निर्यात शुल्क 29.5 रुपये से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करना और बढ़ते आयात खर्च के बीच संतुलन बनाना है।

Diesel-Petrol Excise Duty

कच्चे तेल पर दबाव का असर

भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि हम अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदते हैं। मार्च 2026 के दौरान भी कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई थीं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में निर्यात शुल्क बढ़ाकर सरकार रिफाइनरी कंपनियों द्वारा बाहर भेजे जाने वाले तेल पर नियंत्रण कस रही है, ताकि देश के भीतर तेल की कमी न हो और कीमतों को काबू में रखा जा सके।

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