Airline Transport Pilot License : नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने बुधवार को अपने मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस (ATPL) के लिए इलेक्ट्रॉनिक कार्मिक लाइसेंस (ईपीएल) सेवाओं की शुरुआत की। इसे डीजीसीए की डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य पायलटों और विमानन कर्मियों को सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित सेवाएं प्रदान करना है।
डीजीसीए ने एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस के लिए ईपीएल सेवा शुरू की (तस्वीर-istock)
क्या है इलेक्ट्रॉनिक कार्मिक लाइसेंस (ईपीएल)
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक नागर विमानन मंत्रालय के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक कार्मिक लाइसेंस एक आधुनिक और सुरक्षित डिजिटल लाइसेंस है। इसमें अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के मानकों के अनुसार सुरक्षा सुविधाएं शामिल की गई हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य लाइसेंस की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना, किसी भी तरह की छेड़छाड़ को रोकना और जरूरत पड़ने पर तुरंत सत्यापन को संभव बनाना है। यह डिजिटल लाइसेंस ईजीसीए मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है, जिससे पायलटों को भौतिक दस्तावेज साथ रखने की जरूरत नहीं होगी।
पहले भी शुरू हो चुकी हैं ईपीएल सेवाएं
डीजीसीए ने ईपीएल की शुरुआत फरवरी 2025 में की थी। उस समय वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस (सीपीएल) और फ्लाइट रेडियो टेलीफोन ऑपरेटर (प्रतिबंधित) लाइसेंस यानी एफआरटीओएल के लिए इलेक्ट्रॉनिक लाइसेंस सेवाएं शुरू की गई थीं। अब एटीपीएल के लिए ईपीएल सेवाओं के जुड़ने से यह डिजिटल प्रणाली और मजबूत हो गई है। इससे यह साफ है कि डीजीसीए विमानन क्षेत्र में दक्षता, पारदर्शिता और बेहतर सेवा वितरण के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
विमानन क्षेत्र में सुधार की दिशा में कदम
एटीपीएल जैसे उच्च स्तर के पायलट लाइसेंस को डिजिटल स्वरूप में लाना विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ा बदलाव है। इससे न केवल पायलटों को सुविधा मिलेगी, बल्कि नियामक संस्थाओं और एयरलाइनों के लिए भी लाइसेंस की जांच और निगरानी आसान हो जाएगी। यह कदम भारत के विमानन क्षेत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में मदद करेगा।
इंडिगो पर भारी जुर्माना
इसी बीच डीजीसीए ने एक सख्त कदम उठाते हुए एयरलाइन इंडिगो पर 22.20 करोड़ रुपए का भारी जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर हुई उड़ान विघटन की घटनाओं के लिए लगाया गया। डीजीसीए के अनुसार, 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो ने कुल 2,507 उड़ानें रद्द कीं और 1,852 उड़ानों में देरी हुई।
यात्रियों को हुई भारी परेशानी
इन उड़ान रद्द होने और देरी की घटनाओं के कारण देश भर के विभिन्न हवाई अड्डों पर तीन लाख से अधिक यात्री फंस गए। इससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। इस अव्यवस्था ने न केवल यात्रियों को परेशान किया, बल्कि एयरलाइन की संचालन क्षमता और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
जुर्माने का पूरा ब्योरा
डीजीसीए द्वारा लगाए गए कुल 22.20 करोड़ रुपए के जुर्माने में 1.80 करोड़ रुपए का एकमुश्त दंड शामिल है। यह दंड नागरिक उड्डयन नियमों के कई उल्लंघनों के लिए लगाया गया। इसके अलावा, इंडिगो द्वारा 68 दिनों तक संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों का पालन नहीं किया गया।
नियमों के उल्लंघन पर सख्ती
एफडीटीएल नियमों के उल्लंघन के लिए डीजीसीए ने इंडिगो पर प्रतिदिन 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। इस तरह 68 दिनों में 20.40 करोड़ रुपए का अतिरिक्त दंड जुड़ा। इन सभी दंडों को मिलाकर कुल जुर्माना 22.20 करोड़ रुपए हो गया।
सख्त निगरानी का संदेश
डीजीसीए के ये कदम साफ संदेश देते हैं कि यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और नियमों का पालन सर्वोपरि है। जहां एक ओर डिजिटल लाइसेंस जैसी पहल से विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नियमों का उल्लंघन करने वाली एयरलाइनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भविष्य में ऐसी अव्यवस्थाएं दोबारा न हों।
