Putin - Jinping De Dollarization to Northern Sea Route Plan : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन फिलहाल चीन के दौरे पर हैं। वहां, चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ वे ऐसी प्लानिंग में जुटे हैं, जिससे अमेरिका को बड़ा झटका लगना तय है। वहीं, बात-बात पर भड़कने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो पूरी तरह जलभुन ही जाएंगे। भले ही पुतिन और जिनपिंग की इस प्लानिंग में भारत की कोई भूमिका नहीं, लेकिन अगर प्लानिंग कामयाब रहती है, तो भारत को भी बढ़ा फायदा मिलना तय है। खासतौर पर भारत को रूसी क्रूड, गैस और फर्टिलाइजर्स की सप्लाई आसान होगी।
पुतिन - जिनपिंग के प्लान से ट्रंप होंगे परेशान
ग्लोबल डिप्लोमैसी ऐसे दौर में है, जहां बहुत सारी बातें कूटनीतिक अंदाज में बयां करने की जगह, सीधे सपाट कही जाती हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को यह चलन शुरू करने का श्रेय दिया जा सकता है। ट्रंप की ही तरह एकदम सीधे-सपाट अंदाज में पहली बार रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ऐसी बात कहीं हैं, जिनसे अमेरिकी डॉलर की बादशाहत को झटका लगना तय है। इसके साथ ही Trump का भड़कना भी निश्चित है।
रूसी राष्ट्रपति ने क्या कहा?
रूस की समाचार एजेंसी स्पूतनिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में पुतिन ने कहा, "रूस-चीन का सारा ट्रेड अब नेशनल करेंसी में होता है।" पुतिन ने कहा, "हमने आपसी ट्रेड का एक स्टेबल सिस्टम बनाया है, जो किसी भी बाहरी असर और ग्लोबल मार्केट के नेगेटिव ट्रेंड से सुरक्षित है।" इसके साथ ही रूसी मीडिया ने बताया कि रूस सिर्फ चीन के साथ ही नेशनल करेंसी में ट्रेड नहीं कर रहा है। बल्कि, भारत और रूस के बीच होने वाले कारोबार का 96% हिस्सा नेशनल करेंसी में सेटल हो रहा है।" राष्ट्रपति पुतिन का यह बयान सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर को चुनौती है। रूस De Dollarization का सबसे बड़ा समर्थक है। खासतौर पर BRICS के जरिये डॉलर को चुनौती देना चाहता है।
नॉर्दन सी रूट पर हुई चर्चा
रूसी राष्ट्रपति पुतिन और जिनपिंग के बीच बातचीत के दौरान Northern Sea Route की चर्चा भी हुई। भारत और रूस इसके विकास पर सक्रियता के साथ बात कर रहे हैं। खासतौर पर आइसब्रेकर, नए पोर्ट, पोलर शिपिंग और कार्गो रूट बनाने और ट्रेनिंग के मॉड्यूल बनाने पर बात हो रही है।
जिनपिंग ने कही ये बड़ी बात
होर्मुज के बंद होने से उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट को लेकर जिनपिंग ने ट्रंप को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "एकतरफा कार्रवाई और बेलगाम दबदबे ने वैश्विक व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है। इन हरकतों से दुनिया के फिर से जंगलराज की तरफ लौटने का जोखिम बढ़ गया है।" इसके साथ ही जिनपिंग ने बताया कि रूस और चीन ने मल्टीपोलर दुनिया बनाने पर एक जॉइंट डिक्लेरेशन पर साइन किया है। दोनों देश दुनिया को बहु-ध्रुवीय बनाने के लिए और करीबी सहयोग करेंगे।
भारत को क्या फायदा?
होर्मुज संकट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा किया है। ऐसे में भारत अपने ऊर्जा स्रोतों को पूरी तरह डायवर्सिफाई करना चाहता है। नॉर्दर्न सी रूट भारत की इस योजना का एक बड़ा हिस्सा है। नॉर्दर्न सी रूट (NSR) एशिया-यूरोप शिपिंग टाइम को लगभग 50% तक कम कर रहा है। खासतौर पर रूस से आयात के लिहाज से भारत के लिए यह रूट एनर्जी सिक्योरिटी के विकल्पों के साथ कॉस्ट सेविंग भी देता है। इससे रूस से आयात में 30-40% कम फ्यूल कंजम्पशन होता है।
इसे चेन्नई-व्लादिवोस्तोक ईस्टर्न मैरीटाइम कॉरिडोर के तौर पर शुरू कर दिया गया है। इस रास्ते से रूस से शिप सिर्फ 12 दिनों में भारत पहुंच जाता है। इसके अलावा यह भारत को यूरोप तक एक्सेस का एक वैकल्पिक रास्ता देगा। इसके साथ ही आर्कटिक प्रोजेक्ट्स, आइस-क्लास वेसल और शिपबिल्डिंग में जॉइंट इन्वेस्टमेंट से नए बिजनेस और रोजगार के मौके बन रहे हैं।
भारत के लिए क्यों फायदे का सौदा?
पुतिन-जिनपिंग का डी-डॉलराइजेशन और वैकल्पिक रूट्स पर जोर देना भारत की अपनी ऊर्जा सुरक्षा और स्वतंत्र विदेश नीति के लिहाज से बेहद अहम है। इससे जहां भारत को क्रूड, गैस और फर्टिलाइजर्स जैसे उत्पादों के आयात की लागत में कमी होगी। वहीं, अगर नेशनल करेंसी ट्रेड मॉडल मजबूत होता है, तो भारत को जिस तरह आज विदेशी मुद्रा भंडार की चिंता करनी पड़ रही है, उससे मुक्ति मिल जाएगी।
