Crude Oil Prices: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को अचानक तेज उछाल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतें करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गईं। यह बढ़ोतरी जुलाई 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। दरअसल, अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के बढ़ते युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतों में और उछाल आ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों बढ़ोतरी (तस्वीर-istock)
ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा
वैश्विक मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी बड़ी तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत एक समय 18.35 डॉलर यानी करीब 19.8 प्रतिशत बढ़कर 111.04 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। बाद में यह करीब 107.07 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करती दिखी, जो फिर भी करीब 15.5 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह उछाल तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और आपूर्ति बाधित होने के डर की वजह से आया है।
WTI क्रूड भी 106 डॉलर के पार
अमेरिकी कच्चे तेल यानी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी जबरदस्त तेजी देखी गई। WTI क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 15.27 डॉलर यानी करीब 16.8 प्रतिशत बढ़कर 106.17 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। कारोबार के दौरान एक समय इसकी कीमत 111.24 डॉलर प्रति बैरल तक चली गई थी, जो लगभग 22.4 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाती है। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि वैश्विक तेल बाजार में तनाव का असर तेजी से दिखाई दे रहा है।
पिछले हफ्ते भी रही थी भारी तेजी
तेल की कीमतों में यह तेजी अचानक नहीं आई है। पिछले हफ्ते भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े थे। ब्रेंट क्रूड में पिछले सप्ताह लगभग 27 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी, जबकि WTI क्रूड करीब 35.6 प्रतिशत तक चढ़ गया था। लगातार बढ़ती कीमतों से संकेत मिल रहे हैं कि वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय बेहद संवेदनशील स्थिति में है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि इस उछाल की बड़ी वजह मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव है। खास तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर इस मार्ग पर किसी तरह की रुकावट आती है तो वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
तेल की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी का असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है। तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई भी बढ़ने की संभावना है। खास तौर पर भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि यहां कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतें और भी ऊपर जा सकती हैं। इससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका है।
