रिकॉर्ड हाई से 56% टूट चुका है कच्चा तेल, फिर भी देश में क्यों सस्ता नहीं हो रहा पेट्रोल-डीजल?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत के लिए कच्चे तेल की औसत आयात कीमत घटकर 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। मिडिल ईस्ट में तनाव शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब तेल के दामों में इतनी बड़ी गिरावट देखी गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार से भारत के लिए एक बहुत ही अच्छी और राहत भरी खबर आई है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी गिरावट की वजह से भारत के लिए तेल का आयात (Import) करना अब काफी सस्ता हो गया है। हालत यह है कि भारत के कच्चे तेल की खरीद लागत अब 70 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे फिसल चुकी है। इस गिरावट से सरकारी तेल कंपनियों पर बना भारी-भरकम दबाव काफी हद तक कम हो गया है। लेकिन, अगर आप यह सोच रहे हैं कि कच्चा तेल सस्ता होने से आपकी गाड़ी में डलने वाला पेट्रोल और डीजल भी तुरंत सस्ता हो जाएगा, तो आपको अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। तेल कंपनियों और सरकार दोनों की अपनी कुछ बड़ी आर्थिक मजबूरियां हैं, जिसकी वजह से आम जनता को इसका फायदा तुरंत नहीं मिल पा रहा है।

Crude Oil

ऑल-टाइम हाई से 56% नीचे आया कच्चा तेल

आंकड़ों पर नजर डालें तो हाल ही में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत घटकर 68.86 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे विवाद और तनाव के बाद यह पहली बार है जब कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर के स्तर से नीचे आए हैं। यह मौजूदा कीमत बीते 23 मार्च को दर्ज किए गए 157.04 डॉलर प्रति बैरल के ऑल-टाइम हाई (रिकॉर्ड ऊंचाई) के मुकाबले 56 फीसदी से भी ज्यादा कम है। कच्चे तेल के इतना सस्ता होने से इंडियन ऑयल, एचपी और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों ने बड़ी राहत की सांस ली है।

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