अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के बीच गुरुवार सुबह क्रूड के दाम फिर से 100 डॉलर पार हो गए हैं। होर्मुज में ईरानी हमलों के बीच ब्रेंट क्रूड फिर $100 के पार पहुंच गया। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA ने 40 करोड़ बैरल रिजर्व रिलीज किया है। वहीं, अमेरिका ने 17.2 करोड़ बैरल तेल रिजर्व से निकालने का ऐलान किया है। लेकिन, सप्लाई बाधित होने के डर से कीमतें फिर से बढ़ने लगी हैं।
क्रूड के दाम में फिर लगी आग
ब्रेंट क्रूड $100 के पार, WTI भी उछला
गुरुवार को ग्लोबल ऑयल मार्केट में तेज हलचल देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 8-9% उछलकर $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गया। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क West Texas Intermediate (WTI) भी करीब $94-95 प्रति बैरल तक चढ़ गया। यह दूसरी बार है जब ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतें फिर $100 के ऊपर पहुंची हैं।
होरमुज बना सबसे बड़ा जोखिम
तेल बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह Strait of Hormuz में बढ़ता तनाव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस क्षेत्र में कई कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया गया है और टैंकर मूवमेंट लगभग ठप पड़ गया है। यह मार्ग बेहद अहम है क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और रिफाइंड फ्यूल इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में सप्लाई बाधित होने का डर कीमतों को ऊपर धकेल रहा है।
IEA ने रिलीज किया बड़ा रिजर्व
तेल की तेजी को काबू में लाने के लिए International Energy Agency (IEA) ने बड़ा कदम उठाया है। IEA के 32 सदस्य देशों ने मिलकर 40 करोड़ बैरल तेल अपने स्ट्रेटेजिक रिजर्व से जारी करने का फैसला किया है। 1973 के ऑयल एम्बार्गो के बाद एजेंसी के इतिहास में यह सबसे बड़ा समन्वित रिजर्व रिलीज माना जा रहा है।
अमेरिका भी खोलेगा रिजर्व
अमेरिका ने भी अपने Strategic Petroleum Reserve (SPR) से करीब 17.2 करोड़ बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के मुताबिक अगले हफ्ते से शिपमेंट शुरू हो सकती है और पूरे ऑपरेशन को पूरा होने में करीब 120 दिन लग सकते हैं।
क्यों नहीं शांत हो रहा तेल बाजार
विश्लेषकों का मानना है कि सिर्फ रिजर्व रिलीज से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। असल चिंता यह है कि होर्मुज में शिपिंग बाधित हो रही है, जहां से तेल के साथ-साथ जेट फ्यूल और कई रिफाइंड प्रोडक्ट्स की सप्लाई भी गुजरती है। इसके अलावा ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध लंबा खिंचने की आशंका भी बाजार को बेचैन कर रही है। ईरान ने बुधवार-गुरुवार के बीच थाईलैंड, भारत और अमेरिका के शिपिंग कंटेनर्स पर हमले किए हैं। इसकी वजह से अस्थिरता और बढ़ गई है।
सीजफायर पर अटकी बातचीत
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए संकेत दिया है कि सीजफायर तभी संभव होगा जब अमेरिका और इजरायल भविष्य में हमले नहीं करने की गारंटी दें। इसके साथ ही ईरान ने पुनर्निर्माण के लिए मुआवजे और अपने अधिकारों की मान्यता की भी मांग की है। हालांकि अमेरिकी पक्ष के इन शर्तों को मानने की संभावना कम बताई जा रही है।
