Cooking Oil Price Cut: देश भर के घरों में खाना पकाने के तेल की बढ़ती खपत और महंगाई के दबाव के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने कच्चे खाद्य तेलों पर लगने वाले आयात शुल्क (Import Duty) में कटौती करने का फैसला किया है। नई दरें 31 मई से पूरे देश में लागू होंगी और इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद आने वाले दिनों में रसोई के तेल की कीमतों में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिल सकती है।
खाने वाले तेल की कीमत घटी (तस्वीर-istock)
आयात शुल्क 20% से घटाकर 10% किया गया
अब तक कच्चे पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर 20 प्रतिशत आयात शुल्क (Import Duty) लगाया जाता था। सरकार ने इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया है। इससे इन तेलों पर कुल कर भार 27.5 प्रतिशत से घटकर 16.5 प्रतिशत रह जाएगा। पिछले साल सितंबर 2024 में जब इन पर शुल्क बढ़ाया गया था, तब बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। अब शुल्क कम होने से कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है।
भारत की आयात पर निर्भरता
भारत अपनी कुल खाद्य तेल की जरुरत का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। देश में तिलहन उत्पादन कम होने के कारण यह निर्भरता बनी हुई है। भारत मुख्य रूप से पाम तेल इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से आयात करता है। वहीं सूरजमुखी तेल अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से मंगाया जाता है। ऐसे में आयात शुल्क कम होने का सीधा असर घरेलू बाजार की कीमतों पर पड़ता है।
उद्योग जगत को राहत, उपभोक्ताओं को फायदा
उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि आयात शुल्क में कमी से तेल कंपनियों की लागत घटेगी और इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। कई कंपनियों ने पहले ही अपने उत्पादों के दाम कम करना शुरू कर दिया है। प्रोसेसिंग यूनिट्स ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि जैसे ही कम शुल्क पर आयात की नई खेप पहुंचेगी, कीमतों में और कमी की जाएगी।
सरकार की सख्त निगरानी
उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय इस फैसले के असर पर कड़ी नजर रखे हुए है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि शुल्क में कटौती का फायदा सीधे आम जनता को मिले। इसी उद्देश्य से कई राज्यों में निरीक्षण किए जा रहे हैं। आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा खाद्य तेल रिफाइनरी हैं। अधिकारियों ने इन राज्यों में प्रोसेसिंग यूनिट्स और बंदरगाहों के पास बने गोदामों का दौरा किया है। निरीक्षण के दौरान यह देखा जा रहा है कि पैकेज्ड रिफाइंड सूरजमुखी तेल और सोयाबीन तेल के खुदरा मूल्य (MRP) और वितरक मूल्य (PTD) में कितनी कमी आई है। सरकार चाहती है कि कंपनियां लागत में आई कमी को उपभोक्ताओं तक पूरी तरह पहुंचाएं।
महंगाई पर काबू पाने की कोशिश
पिछले कुछ महीनों में खाद्य तेल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी देखी गई थी, जिससे आम लोगों के घरेलू बजट पर असर पड़ा। सरकार का यह कदम महंगाई पर नियंत्रण पाने और जरूरी वस्तुओं को सस्ता रखने की दिशा में उठाया गया है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि बाजार में कीमतें धीरे-धीरे कम हो रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर रहती हैं और आयात सुचारू रूप से जारी रहता है, तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को और राहत मिल सकती है। इस फैसले से न केवल घरों का बजट सुधरेगा, बल्कि बाजार में मांग भी बढ़ सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर, 31 मई से लागू होने वाला यह फैसला करोड़ों परिवारों के लिए राहत भरी खबर साबित हो सकता है।
