ऑफिस टाइम में अपने काम से निकले बाहर और हो गया एक्सीडेंट, तो क्या कंपनी भरेगी मुआवजा?

ड्यूटी आवर्स के दौरान ऑफिस से बाहर निकलकर किसी अनौपचारिक काम या सहकर्मियों के लिए सामान लाते समय यदि कोई दुर्घटना हो जाए, तो क्या कंपनी मुआवजा देने के लिए बाध्य है? जानिए भारतीय कानूनों और अदालती फैसलों के तहत इसके क्या नियम हैं।

वर्कप्लेस पर काम के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर श्रम कानूनों में स्पष्ट प्रावधान दिए गए हैं, लेकिन जब हादसा ऑफिस टाइम के दौरान किसी अनौपचारिक या निजी काम से बाहर जाने पर होता है, तो मुआवजे को लेकर स्थिति काफी जटिल हो जाती है। हाल ही में अमेरिका के न्यू जर्सी में ऐसा ही एक दिलचस्प मामला अदालत के सामने आया, जहां एक कर्मचारी अपनी ड्यूटी के दौरान सहकर्मियों के लिए किसी भी काम से अगर बाहर गए और रास्ते में दुर्घटना का शिकार हो गया। कर्मचारी ने अपनी गाड़ी को हुए नुकसान के लिए कंपनी को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि यह कोई आधिकारिक काम नहीं था बल्कि कर्मचारी की अपनी निजी गतिविधि थी, इसलिए कंपनी मुआवजे के लिए जवाबदेह नहीं है। इस फैसले ने दुनिया भर के कॉर्पोरेट जगत में यह बहस छेड़ दी है कि क्या भारत में भी ऐसे मामलों में कंपनी पर कोई कानूनी जिम्मेदारी बनती है।

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क्या हैं नियम?

भारतीय कानून और श्रम विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में भी ऐसे मामलों को लेकर अमेरिका जैसा ही रुख अपनाया जाता है। यदि कोई कर्मचारी अपने सहकर्मियों के साथ किसी अनौपचारिक पार्टी की तैयारी के तहत सामान लेने बाहर जाता है और रास्ते में उसकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है, तो कंपनी कानूनी रूप से उसकी निजी गाड़ी के नुकसान या मुआवजे की भरपाई करने के लिए बाध्य नहीं होती। भारत में ऐसे मामलों की समीक्षा मुख्य रूप से 'एम्प्लॉइज कॉम्पेंसेशन एक्ट, 1923' (Employees' Compensation Act, 1923) के तहत की जाती है। इस कानून का सीधा और स्पष्ट सिद्धांत यह है कि कंपनी केवल तभी मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी होगी जब दुर्घटना 'रोजगार के दौरान और उसी के कारण' (In the course of and arising out of employment) हुई हो। यानी हादसे और कर्मचारी की आधिकारिक ड्यूटी के बीच सीधा और प्रत्यक्ष संबंध साबित होना अनिवार्य है।

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