किराये से जुड़े नियम भले ही अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हैं। लेकिन, कुछ सैद्धांतिक समानताएं हर जगह होती हैं। मसलन, किरायेदार से घर खाली कराने के लिए उचित नोटिस देने का नियम सभी राज्यों में है। यही वजह है कि ज्यादातर लोग यह जानते हैं कि किसी भी हाल में बिना नोटिस किरायेदार से घर खाली नहीं करा सकते हैं। लेकिन, हर नियम में कुछ अपवाद भी होते हैं। इसी तरह बिना नोटिस के घर खाली कराने के मामले में भी कुछ अपवाद हैं। यह जानकार काफी लोगों को हैरानी हो सकती है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में मकान मालिक बिना नोटिस के भी किरायेदार से घर खाली करा सकता है।
मकान मालिक नहीं कर सकते मनमानी
किस कानून के आधार पर बने हैं नियम?
भारत में किरायेदारी से जुड़े नियम मुख्य रूप से Transfer of Property Act और Model Tenancy Act 2021 के आधार पर तय होते हैं। इस कानून के मुताबिक मासिक किरायेदारी खत्म करने के लिए आमतौर पर 15 दिन का नोटिस जरूरी होता है। वहीं, सालाना लीज के मामलों में 6 महीने तक का नोटिस देना पड़ सकता है। हालांकि, नोटिस से जुड़ी शर्तें आमतौर पर रेंट या लीज एग्रीमेंट के हिसाब से तय होती हैं।
कब शुरू हो सकती है बेदखली की कार्रवाई?
मकान मालिक कुछ खास परिस्थितियों में किरायेदार के खिलाफ बेदखली की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इसमें सबसे बड़ी वजह किराया नहीं देना है। इसके अलावा मकान को नुकसान पहुंचाना, बिना अनुमति सबलेट करना या रेंट एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन करना शामिल है। हालांकि, इन हालात में भी बिना नोटिस के घर को खाली नहीं कराया जा सकता। मकान मालिक को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है।
किरायेदार को निकालने की कानूनी प्रक्रिया
कानून के मुताबिक मकान मालिक को पहले कानूनी नोटिस देना होता है। इसके बाद सिविल कोर्ट या रेंट अथॉरिटी में बेदखली का मामला दायर किया जाता है। फिर कोर्ट में सुनवाई होती है और आदेश आने के बाद ही बेदखली लागू की जा सकती है।
मकान मालिक क्या नहीं कर सकता?
कानून मकान मालिक को कुछ सख्त सीमाओं में बांधता है। मसलन, मकान मालिक खुद से ताला नहीं बदल सकता, बिजली-पानी नहीं काट सकता है। न ही किरायेदार का सामान बाहर फेंक सकता है। ऐसा करना अवैध बेदखली या उत्पीड़न माना जा सकता है। ऐसे मामलों में किरायेदार पुलिस या अदालत की मदद ले सकता है।
नए किराया कानून में क्या बदला?
Model Tenancy Act 2021 के तहत लिखित रेंट एग्रीमेंट को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा सिक्योरिटी डिपॉजिट की सीमा तय की गई है। इसके साथ ही किराया विवादों को तेजी से निपटाने की व्यवस्था की गई है। नए ढांचे में डिजिटल रजिस्ट्रेशन और दस्तावेजी रिकॉर्ड को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
कब बिना नोटिस खाली कराया जा सकता है घर?
कानून के मुताबिक मकान मालिक बिना सामान्य नोटिस की स्थिति में तभी कब्जा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है, जब Transfer of Property Act, 1882 की धारा 111(a) के तहत किरायेदारी पहले से तय अवधि की हो और वह अवधि खत्म हो जाए, या किरायेदार किरायेदारी सरेंडर कर दे। इसके अलावा धारा 111(b) और 111(c) के तहत अगर किरायेदारी किसी तय घटना या मकान मालिक के अधिकार खत्म होने के कारण समाप्त हो जाए, तो भी किरायेदारी खत्म मानी जा सकती है। वहीं, किरायेदारी की शर्तों के उल्लंघन या जब्ती का प्रावधान धारा 111(g) में है। हालांकि, ज्यादातर घरों में लागू महीने-दर-महीने किरायेदारी में धारा 106 के तहत 15 दिन या एग्रीमेंट में तय अवधि का लिखित नोटिस देना जरूरी होता है।
