वित्त वर्ष 2026–27 के केंद्रीय बजट में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए बैगेज (सामान) नियमों को आसान बनाने, ड्यूटी-फ्री सीमा बढ़ाने और कस्टम्स प्रक्रियाओं को सरल करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके साथ ही कैंसर की दवाओं सहित कई वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी में कटौती की घोषणा की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि संशोधित बैगेज नियम मौजूदा यात्रा परिस्थितियों के अनुरूप होंगे और देश में अस्थायी रूप से लाई या बाहर ले जाई जाने वाली वस्तुओं को लेकर स्पष्टता प्रदान करेंगे।
केंद्रीय बजट 2026: बैगेज नियमों में बदलाव से यात्रियों को राहत
बजट में बैगेज नियम, 2016 में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। मौजूदा नियमों के तहत नेपाल, भूटान और म्यांमार को छोड़कर अन्य देशों से आने वाले भारतीय नागरिकों और भारत में रहने वाले विदेशियों को 50,000 रुपये तक का सामान ड्यूटी-फ्री लाने की अनुमति है। प्रस्तावित नए ढांचे का उद्देश्य यात्रियों के लिए प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और अनुकूल बनाना है।
यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए बजट में व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयातित वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है। हालांकि, यह रियायत मोटर वाहन, शराब और तंबाकू उत्पादों पर लागू नहीं होगी।
बैगेज नियमों के साथ-साथ वित्त मंत्री ने “ट्रस्ट-आधारित” कस्टम्स व्यवस्था की भी घोषणा की, जिसका उद्देश्य कार्गो क्लीयरेंस को आसान बनाना और अनुपालन लागत को कम करना है। इस प्रणाली में सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म, स्थापित सप्लाई चेन वाले नियमित आयातकों के लिए कम जांच और अधिकृत आर्थिक परिचालकों (AEO) के लिए सरल शुल्क भुगतान व्यवस्था शामिल होगी।
सरकार बंदरगाहों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्कैनिंग का उपयोग करने और दो वर्षों के भीतर कस्टम्स इंटीग्रेटेड सिस्टम लागू करने की भी योजना बना रही है, जिससे सभी कस्टम्स प्रक्रियाएं एकीकृत हो सकें।
वित्त मंत्री ने कहा कि ईमानदार करदाताओं को अब जुर्माने का सामना करने के बजाय अतिरिक्त राशि का भुगतान कर कस्टम्स विवाद निपटाने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही, एडवांस रूलिंग की वैधता अवधि को मौजूदा तीन वर्षों से बढ़ाकर पांच वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया है, जो कस्टम्स अधिकारियों पर बाध्यकारी होगी।
बजट में कस्टम्स वेयरहाउसिंग व्यवस्था को भी स्व-घोषणा, इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग और जोखिम-आधारित ऑडिट पर आधारित वेयरहाउस ऑपरेटर-केंद्रित प्रणाली में बदलने का प्रस्ताव किया गया है।
अपने बजट भाषण में सीतारमण ने कहा, इन प्रस्तावों का उद्देश्य टैरिफ संरचना को और सरल बनाना, घरेलू विनिर्माण को समर्थन देना, निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और ड्यूटी संरचना में असंतुलन को सुधारना है।”
उन्होंने जोड़ा कि ये सुधार अधिकारी-निर्भर अनुमोदनों से दूर जाकर लेनदेन में देरी और अनुपालन लागत को कम करने में मदद करेंगे।
