Global Stock Market Today : कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर ग्लोबल संकेतों ने शेयर बाजार के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इंटरनेशनल बेंचमार्क Brent क्रूड सोमवार सुबह 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जबकि भारत के लिए अहम इंडियन क्रूड बास्केट का भाव 119.99 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया।
क्रूड ने बढ़ाई टेंशन
इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में गिरावट के बाद सोमवार को एशियाई बाजारों में भी ज्यादातर प्रमुख इंडेक्स दबाव में रहे। हालांकि, GIFT Nifty में मामूली गिरावट है, जिससे भारतीय बाजार में फिलहाल बड़े गैप अप या गैप डाउन के स्पष्ट संकेत नहीं मिल रहे।
युद्ध के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर क्रूड
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से Brent Crude सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। पिछले सत्र में ब्रेंट क्रूड का भाव
117.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं, आखिर में 116.72 पर बंद हुआ। पिछली क्लोजिंग की तुलना में फिलहाल क्रूड 1.55 फीसदी नीचे 114.91 पर ट्रेड कर रहा है। सऊदी अरब में हूती हमलों के बाद तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका ने कीमतों को सहारा दिया। सोमवार की गिरावट के बावजूद क्रूड का भाव ऊंचे स्तर पर है। इससे पहले अप्रैल और मई में क्रूड के दाम 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहे थे।
इंडियन बास्केट में $120 के करीब कीमत
भारत के लिए चिंता सिर्फ अंतरराष्ट्रीय Brent की कीमत नहीं, बल्कि आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की लागत भी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 22 अक्टूबर को इंडियन क्रूड बास्केट का भाव 119.99 डॉलर प्रति बैरल था। दिए गए आंकड़ों में अक्टूबर का औसत भाव भी करीब 120 डॉलर प्रति बैरल है।
क्या बढ़ेगा पेट्रोल-डीजल का खर्च?
महंगे तेल का असर भारत के आयात बिल, रुपये और महंगाई पर सीधे तौर पर पड़ रहा है। इसकी वजह से देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर दिन 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हो रहा है। द हिंदू की एक रिपोर्ट के के मुताबिक पेट्रोल पर कंपनियों को 8 और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा प्रत्येक LPG सिलिंडर पर 300 रुपये की अंडर रिकवरी हो रही है। इस तरह कंपनियां भारी दबाव में है। हालांकि, त्योहारी सीजन में दाम बढ़ने की आंशका नहीं है। लेकिन, त्योहारों के बाद भी क्रूड के दाम बढ़े हुए रहते हैं, तो कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक पास कर सकती हैं।
अमेरिकी बाजारों में बिकवाली
शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में कमजोरी देखने को मिली। Dow Jones Industrial Average 652.82 अंक यानी करीब 1.23% गिरकर 52,215.16 पर बंद हुआ। S&P 500 में 0.52% और Nasdaq Composite में 0.21% की गिरावट रही। हालांकि, सोमवार सुबह अमेरिकी वायदा बाजार में कुछ संभलने के संकेत मिले। उपलब्ध आंकड़ों में Dow Jones Futures 0.24% ऊपर 52,341.69 पर था। इसका मतलब है कि शुक्रवार की कमजोरी के बाद बाजार फिलहाल सतर्क हैं, लेकिन सभी ग्लोबल बाजारों में एक जैसी गिरावट नहीं है।
एशियाई बाजारों में कहां कितनी गिरावट?
सोमवार सुबह एशियाई बाजारों में ज्यादातर प्रमुख इंडेक्स नीचे कारोबार कर रहे थे। जापान का Nikkei 225 करीब 0.26% और दक्षिण कोरिया का KOSPI 0.92% गिरा। चीन के Shanghai Composite में 0.36% और सिंगापुर के Straits Times में 0.43% की कमजोरी थी। इसके उलट, हांगकांग का Hang Seng 0.31% ऊपर था।
GIFT Nifty से क्या मिल रहा है संकेत?
सुबह 7:36 बजे GIFT Nifty 22,599.50 पर था, जो पिछले बंद से 8.50 अंक यानी 0.04% नीचे है। यह भारतीय बाजार के लिए लगभग सपाट शुरुआत का संकेत है। हालांकि, कारोबार शुरू होने के बाद बाजार की दिशा बदल सकती है।
इस सप्ताह फेड की बैठक पर नजर
इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर की बैठक भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि ऊंची ऊर्जा कीमतों के बीच फेड महंगाई और ब्याज दरों पर क्या रुख अपनाता है।
