1 डॉलर प्रति बैरल सस्ता हुआ ब्रेंट क्रूड ऑयल तो भारत के बचेंगे इतने लाख करोड़ रुपये!

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम गिरकर 82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। कच्चे तेल में आई इस नरमी से भारत के आयात बिल में भारी कमी आएगी, जिससे देश को लाखों करोड़ रुपये की बचत होगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ता है। वैश्विक स्तर पर उपजी भू-राजनीतिक (Geopolitical) राहत के बीच तेल की कीमतों को लेकर एक बहुत अच्छी खबर सामने आ रही है। हाल ही में समुद्री व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के दोबारा पूरी तरह खुल जाने से कच्चे तेल की सप्लाई सुचारू हो गई है, जिससे तेल के दामों में भारी कमी देखी जा रही है। जब यह समुद्री रास्ता तनाव के चलते बंद हो गया था, तब कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूते हुए 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। लेकिन अब होर्मुज खुलने से वैश्विक बाजार को बड़ी राहत मिली है और ब्रेंट क्रूड की कीमतें घटकर लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई हैं।

crude oil

कितना है कच्चे तेल का दाम?

ब्रेंट क्रूड (ICE) का भाव अगस्त 2026 के कॉन्ट्रैक्ट के लिए 0.49 डॉलर यानी 0.59% की गिरावट के साथ 82.68 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड ऑयल भी 0.28 डॉलर यानी 0.35 की गिरावट के साथ 80.47 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की इस नरमी से भारत जैसे विशाल उपभोक्ता देश के लिए बचत का एक नया रास्ता खुल गया है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात (Import) करता है।

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