Term Insurance Rules: पति और नॉमिनी पत्नी दोनों की हादसे में मौत; जानिए किसे और कैसे मिलेगा बीमा का पैसा

यदि किसी दुर्घटना में पॉलिसीहोल्डर (पति) और उनकी नॉमिनी (पत्नी) दोनों की एक साथ मृत्यु हो जाती है, तो टर्म इंश्योरेंस क्लेम का क्या होता है? जानिए ऐसे मामलों में बीमा कंपनी किसे और कैसे पैसों का भुगतान करती है।

टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय हर व्यक्ति अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए किसी एक सदस्य—आमतौर पर अपनी पत्नी या पति—को 'नॉमिनी' (Nominee) बनाता है। नॉमिनी वही व्यक्ति होता है जिसे पॉलिसीहोल्डर की मृत्यु के बाद बीमा राशि (Sum Assured) पाने का कानूनी अधिकार होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर किसी दुर्भाग्यपूर्ण सड़क हादसे या दुर्घटना में पॉलिसीहोल्डर और नॉमिनी दोनों की एक साथ या कुछ समय के अंतराल पर मौत हो जाए, तो बीमा का पैसा किसे मिलेगा? ऐसी स्थिति में क्लेम की प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो जाती है, लेकिन बीमा कानून में इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं।

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किसे और कैसे मिलेगा बीमा का पैसा

दोनों की हो जाए मौत तो इंश्योरेंस का क्या होगा?

जब पॉलिसीधारक और प्राथमिक नॉमिनी (जैसे पत्नी) दोनों की मृत्यु हो जाती है, तो बीमा कंपनी का पैसा सीधे किसी के खाते में ट्रांसफर नहीं होता। ऐसी स्थिति में बीमा का क्लेम 'कानूनी वारिस' (Legal Heir) या 'उत्तराधिकारी' को दिया जाता है। यदि पॉलिसी लेते समय बीमित व्यक्ति ने किसी दूसरे या बैकअप नॉमिनी (Secondary/Alternate Nominee) का नाम भी दर्ज कराया था, तो पहला अधिकार उसी का होता है। उदाहरण के लिए, अगर पत्नी के अलावा बच्चों को सेकेंडरी नॉमिनी बनाया गया था, तो क्लेम का पूरा पैसा बच्चों को मिल जाता है।

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